शत्रु को कैसे बाहर निकालें

डेरिक प्रिंस हिंदी में
Published: 1985
Last Updated: செப்டம்பர் 2026
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क्या आप पर हमला हो रहा है या आप दबाव महसूस कर रहे हैं, और कारण नहीं समझ पा रहे हैं? जानें कि अवांछित आत्मिक शक्तियाँ हमारे जीवन में कैसे प्रवेश करती हैं, डेरेक प्रिंस के उपदेश 'शत्रु को कैसे निकालें' में - 'मुक्ति के मूल सिद्धांत' श्रृंखला का भाग 2। शास्त्र और विश्वास के माध्यम से अपने आत्मिक स्वतंत्रता को पुनः प्राप्त करें।
Transcript
इस सत्र में हम इस पूरे विषय में सबसे महत्वपूर्ण व्यावहारिक प्रश्नों में से एक का जवाब देने के द्वारा शुरू करने जा रहे हैं, एक ऐसा प्रश्न, जिसके बारे में कई लोग चिंतित हैं, अर्थात् दुष्टात्मा कैसे प्रवेश करते हैं? कैसे वे मानव व्यक्तित्व और जीवन में प्रवेश कर पाते हैं? मैं आप को जो उत्तर पेशकश करने जा रहा हूँ, वह मेरे अनुभव के आधार पर हैं और मैं किसी भी तरह यह सुझाव नहीं दे रहा हूँ कि वे पूरी तरह से पूर्ण हैं। लेकिन मैं सात अलग अलग तरीकों की सूची बताऊँगा जिनमें से वे आने में सक्षम हो सकती हैं।
पहला है, जिसे मैं मनोगत पृष्ठभूमि कहता हूँ। दूसरे शब्दों में, कहीं न कहीं अपने परिवार के इतिहास में मनोगत बातों के साथ भागीदारी रही है। और जब आप मनोगत के बारे में बात करते हैं तो आप समझते हैं कि आप झूठे देवताओं के साथ व्यवहार कर रहे हैं। यह वास्तव में यही है। दूसरे शब्दों में पहली दो आज्ञाएँ तोड़ी जाती रही हैं जो कि मूल आज्ञाएँ हैं: तू मुझे छोड़ दूसरों को ईश्वर करके न मानना और तू कोई मूर्ति खोदकर न बनाना। हर प्रकार की मूर्ति पूजा स्वतः ही लोगों को दुष्टात्माओं की ओर ले जाती है। और उन दो आज्ञाओं के संबन्ध में प्रभु ने कहा, कि वह पितरों के पापों का लेखा तीन और चार पीढ़ियों तक लेगा। मैं नहीं मानता कि यह अन्य आज्ञाओं पर बहुत अधिक लागू होता है परन्तु यह प्रथम दो आज्ञाओं के संदर्भ में दिया गया है। और इस प्रकार यदि आपका पिता, आपका दादा, या आपके परदादा या कोई अन्य रिश्तेदार इस प्रकार की मनोगत बातों या झूठे धर्म या मूर्तिपूजा के अनुयायी रहे हैं तो आपके जीवन में दुष्टात्मा के आने के लिये द्वार खुला है। अब आप कह सकते हैं, ‘‘यह सही नहीं है!’’ ठीक है, सच्चाई यह है कि शैतान सच्चा नहीं है। परन्तु मैं चाहता हूँ कि आप यह समझें कि इस समस्या में बने रहने के लिये कोई आपको दोषी नहीं ठहरा रहा है। आप पर दोष तभी लगाया जाएगा जब आप समस्या के निदान का तिरस्कार करेंगे। इसी स्थिति में दोषी ठहराया जाना होता है। ठीक है।
दूसरा तरीका, व्यक्तिगत रूप से मनोगत बातों में शामिल होने से होता है। और मैं सोचता हूँ कि हमारे लिये इस समय धर्मशास्त्र पढ़ना अच्छा होगा। अंग्रेजी भाषा में एक कहावत है, मुझे नहीं मालूम कि आपने कभी सुना है, ‘‘वह जो शैतान के साथ सुड़कता है उसे लम्बी डंडीवाला चम्मच इस्तेमाल करना चाहिए।’’ मैं आपको यह बताना चाहता हूँ कि ऐसा कोई चम्मच अब तक नहीं बना है जिसकी डंडी इतनी लम्बी हो कि आप शैतान के साथ सुरक्षित रूप से पी सकें। आप अपनी छोटी उँगली उसे पकड़ाईए और इससे पहले कि आप एक चक्कर लगा लें वह आपकी कोहनी को पकड़ लेगा। झूठी शिक्षाओं के साथ शामिल होने का कोई सुरक्षित तरीका नहीं है। मैं व्यवस्थाविवरण 18ः10-12 पढ़ने जा रहा हूँ।
‘‘तुझ में कोई ऐसा न हो जो अपने बेटे वा बेटी को आग में होम करके चढ़ानेवाला, (भट्ठी में डालकर अपने बच्चों को जीवित बलिदान के रूप में देवताओं को चढ़ाना। अब मैं चाहता हूँ कि आप अन्य बातों को देखें जो परमेश्वर की ओर से आती हैं, उन्हें उसी सूची में वर्गीकृत किया गया है जैसे देवताओं को अपने बच्चों को बलिदान करके आग में होम करना) वा भावी कहनेवाला, वा शुभ अशुभ मुहूर्तों का माननेवाला, वा टोन्हा, वा तान्त्रिक, वा बाजीगर, वा ओझों से पूछनेवाला, वा भूत साधनेवाला, वा भूतों का जगानेवाला हो। क्योंकि जितने ऐसे ऐसे काम करते हैं वे सब यहोवा के सम्मुख घृणित हैं, और इन्हीं घृणित कामों के कारण (यह बहुत ही व्यापक सूची है। मुझे लगता है कि हर प्रकार का घृणित काम शामिल किया गया है।) तेरा परमेश्वर यहोवा उनको तेरे साम्हने से निकालने पर है।’’
बहुत सारे मसीही जन्मकुण्डली के साथ खिलवाड़ करते हैं और सोचते हैं कि इसमें कोई हानि नहीं है। मुझे आपको बताने दीजिए कि यदि आपने मूसा की व्यवस्था के अन्तर्गत जन्मकुण्डली के साथ खिलवाड़ किया है तो आपको मृत्यु की सजा मिलती। इस प्रकार के कार्यों के लिये यह परमेश्वर का आकलन है।
ठीक है, तीसरा है जिसे मैं जन्म से पहले के प्रभाव कहता हूँ - वे बातें जो उस समय घटी जब आप माँ के गर्भ में थे और बहुत से लोगों के जीवनों में उसी दौरान दुष्टात्मा प्रवेश कर जाती है। सबसे सामान्य एकलौता कारण तिरस्कार होता है। माँ अपने बच्चे से नाराज होती है जिसे वह अपने गर्भ में धारण किए हुए है। संभवतः वह विवाहित न हो और यह उसके लिये शर्मिन्दगी का कारण बनने जा रही है या संभव है कि अपने पति के साथ उसका संबन्ध ठीक नहीं चल रहा हो और वह परिवार में दूसरा बोझ नहीं चाहती हो या उनकी आर्थिक परिस्थिति दूसरे बच्चे का लालन-पालन करना उनके लिये कठिन बना रहा हो। कारण चाहे कुछ भी हो वह उस नन्हें जीवन से अप्रसन्न होती है जो उसके गर्भ में प्रारंभ हो रहा है और गर्भ में वह नन्हा व्यक्ति इन मनोवृत्तियों के प्रति बहुत ही संवेदनशील होता है। वह एक भ्रूण मात्र नहीं है, वह एक व्यक्ति है। और वह तिरस्कार की आत्मा लेकर बाहर आता है जो पहले से उसमें है। या एक स्त्री गर्भवती हो और किसी प्रकार का झटका अनुभव करे या भय के क्षण से गुजरे। उसके मन में भय उपजता है, उसमें भय की आत्मा प्रवेश करती है। उसके पास दो विकल्प होते हैं। यह उस स्त्री में या उसके गर्भस्थ शिशु में ठहर सकता है। शिशु में रहना उसके लिये अधिक सुविधाजनक हो सकता है, आपको समझ में आया? तो जब शिशु का जन्म होता है तो वह भय की आत्मा लिये बाहर आता है।
मुझे आपको धर्मशास्त्र का एक संदर्भ बताने दीजिए जिस पर अधिकतर लोग ध्यान नहीं देते हैं, 1 पतरस अध्याय 3 जो पत्नियों के लिये सलाह है। मैं इसका एक पहलू सामने लाना चाहता हूँ। पत्नियों से कहते हुए वह कहता है कि उनके लिये सबसे अच्छा उदाहरण अब्राहम के प्रति सारा का व्यवहार था, मैं इस बिन्दु पर जोर नहीं दे रहा हूँ, आप निराश मत होइए। 1 पतरस 3ः6:
‘‘जैसे सारा इब्राहीम की आज्ञा में रहती थी, और उसे स्वामी कहती थी, सो तुम भी यदि भलाई करो (और यहीं समाप्त नहीं होता) और किसी प्रकार के भय से भयभीत न हो, तो उसकी बेटियाँ ठहरोगी।’’
अब्राहम की बेटी होने के लिये आपको अचानक आए भय का प्रतिरोध करने योग्य होना चाहिए। यह बहुत ही प्रगट है, मैं सोचता हूँ कि स्त्रियाँ पुरुषों की अपेक्षा जल्दी भयभीत या परेशान हो जाती हैं। और पुनः, मैंने लोगों के बहुत से मामले देखे हैं जिन्हें छुटकारे की आवश्यकता होती है क्योंकि उन्होंने माँ के गर्भ में रहते हुए कुछ झटके का अनुभव किया था।
जब मैं पूर्णकालीन सेवा में था या मुझे कहने दीजिए कि अब की तुलना में मैं सेवा में अधिक शामिल था, तो मैंने एक और रोचक बात पर ध्यान दिया - कि संयुक्त राज्य में एक विशेष आयु समूह के लोग थे, जिनमें से अधिकांश को तिरस्कार से छुटकारे की आवश्यकता था। और मैंने सोचना प्रारंभ किया, हो सकता है वे सभी समान समय में जन्म लिये हों। और तब मैंने कहना प्रारंभ किया, उन्होंने किस समय जन्म लिया? और मैंने पाया कि उन्होंने अत्यधिक निराशा के समय जन्म लिया था। और मैंने कारण पाया कि माँ को छः लोगों का पेट भरना था और पर्याप्त धन नहीं था और सातवाँ बच्चा आनेवाला था। और हो सकता है वह एक अच्छी महिला हो परन्तु वह भीतर कहीं अगले बच्चे के उत्तरदायित्व से अप्रसन्न थी, और वह बच्चा तिरस्कार की आत्मा के साथ जन्म लेता है।
ठीक है, इनमें से किसी एक पर अधिक समय बिताने के लिये हमारे पास समय नहीं है। चौथा। परन्तु मुझे कहने दें, कि यदि आप एक भावी कहनेवाले के पास या किसी ऐसे व्यक्ति के पास जाएँ कि यह पता करें कि जन्म लेने पर आपके बच्चे के साथ क्या होगा, तो आपने उसके जन्म लेने से पहले ही उसे ठुकराना शुरू कर दिया है।
चौथा, प्राणिक दबाव। देखिए, आत्मा और प्राण में अन्तर होता है। मैं उसमें जा नहीं सकता हूँ। परन्तु बहुत से ऐसे लोग होते हैं जो दूसरों को कुछ ऐसी बात से नियन्त्रित करते और शोषित करते हैं जिसे मैं ‘‘प्राणिक प्रभुत्व’’ कहता हूँ। समकालीन अमेरिकी संस्कृति में सर्वसाधारण उदाहरण एक माँ का है जो अपने बच्चों पर विशेष कर अपने पुत्रों पर प्रभुत्व जमाती है। यहूदी समुदाय में कैसे एक अच्छी यहूदी माँ बना जा सकता है शीर्षक से एक श्रेष्ठत्तम बिकनेवाली पुस्तक पाया जाता है। और उसके पाठों में से एक यह है कि ‘‘किस प्रकार सार्वजनिक रूप से अपराधबोध के साथ अपने पुत्र से वायलिन बजवाया जाए’’। ठीक, आप यहूदी को कब जानते हैं? यामोमो? वे उसे इब्रानी भाषा में यिद्दिश कहते हैं? यामामोस? मेरा मतलब है, जो बात मैं कर रहा हूँ वे इसके सिद्ध उदाहरण हैं। आप उस स्त्री के बारे में जानते हैं जिसने बड़े थियेटर में जोर से चिल्लाया, ‘‘क्या यहाँ कोई डॉक्टर है?’’ और एक व्यक्ति उठ कर खड़ा हुआ और कहा, ‘‘हाँ, है।’’ और उसने कहा, ‘‘बेटे, मेरे पास तुम्हारे लिए एक बेटी है!’’ ठीक। परन्तु कहानी इससे भी आगे है। मैंने सफल व्यापारियों, बैंक अध्यक्षों और इस प्रकार के लोगों से मुलाकात किया है जो कभी भी भावनात्मक परिपक्वता विकसित नहीं हुए हैं क्योंकि वे अभी भी अपनी माँ की गर्भनाल से जुड़े हुए हैं। आत्मिक गर्भनाल कभी भी काटा नहीं गया। शोषण के उनके तरीके अन्तहीन हैं। मैं एक माँ के बारे में सोचता हूँ जो अपने परिवार को अपने वश में रखती थी, क्योंकि जब भी कुछ गलत होता था तो उसे भयंकर सिरदर्द होता था और पूरा परिवार नख से शिख तक उसके वश में रहता था, बात मत करो, आवाज मत करो, माँ को फिर सिरदर्द होगा। उन्हें यह समझ में नहीं आता था परन्तु सिरदर्द के कारण वह उन्हें हर वह काम करने से रोकती थी जिसे वह नहीं चाहती थी कि वे करें।
इस संदर्भ में दो गन्दे शब्द हैं: प्रभुत्व रखना और हेरफेर करना। और जब कभी आप उनसे मिलते हैं तो आपने शैतान से मुलाकात की है।
ठीक है, पाँचवाँ। मुझे कुछ लोगों से कहना पड़ा है, ‘‘देखो, यदि आप मेरी सहायता करना चाहते हैं, तो मैं ईमानदार हूँ। सच्चाई यह है, कि आपकी माँ एक डायन है। आपको अब भी उनका आदर करना है। परन्तु वह एक डायन है।’’ मुझे लोगों से कहना पड़ा है कि किसने छुटकारा पाया। ‘‘आप अपने माता-पिता के घर में जाने के लिये स्वतन्त्र नहीं हैं, क्योंकि आप इतने अधिक आत्मिक मजबूत नहीं हैं कि प्रभुत्व रखने और हेरफेर करनेवाले प्रभाव से बचे रह सकें।’’
पाँचवाँ, बचपन की प्रारंभिक दशा में दबाव। मैंने पाया है कि दुष्टात्मा के निरन्तर दबाव से बचने के लिये एक बच्चे का आत्मिक और भावनात्मक प्रतिरोध पर्याप्त नहीं होता है। अब याकूब 3ः16 में वचन कुछ ऐसा कहता है जो मन में रखने योग्य है। याकूब अध्याय 3 पद 16।
‘‘इसलिये कि जहाँ डाह और विरोध होता है, वहाँ बखेड़ा और हर प्रकार का दुष्कर्म भी होता है।’’
तो जहाँ माता-पिताओं के बीच में तनाव और बेसुरापन का माहौल होता है, वहाँ एक ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है जिसमें बच्चे स्वतः ही दुष्टात्मा के प्रभाव में आ जाएँगे। और मैं कहता हूँ कि 90 प्रतिशत से अधिक बच्चे इन प्रभावों से बचने में असमर्थ हैं। मेरा अवलोकन यह है कि दुष्टात्मा की 80 प्रतिशत समस्याएँ एक व्यक्ति के जीवन में पाँच वर्ष की उम्र से पहले प्रारंभ होता है और उस स्थिति के लिये माता-पिता जिम्मेदार होते हैं। आपने समझा?
छठवाँ, कमजोरी के क्षण या स्थान। यह भावनात्मक कमजोरी हो सकती है, यह शारीरिक कमजोरी हो सकती है। एक स्त्री गली के कोने पर खड़ी है और उसकी आँखों के सामने एक भयावह दुर्घटना होती है। उसे भय की आत्मा जकड़ लेती है। या एक स्त्री के पास एक ही बच्चा है; असल में यह एक ऐसी स्थिति है जिस पर मैंने काम किया है। उसका एक लड़का पाँच वर्ष की उम्र में मर गया। वह निराशा में डूब जाती है और वर्षों तक ऐसे ही रहती है। दुःख की आत्मा उसे जकड़ लेती है जो एक शक्तिशाली आत्मा है। या एक स्त्री विवाह की उम्मीद कर रही है और अन्तिम क्षणों में सगाई निरस्त कर दी जाती है और वह निराशा की आत्मा का शिकार हो जाती है और पूरा जीवन एक अधूरे व्यक्ति के रूप में बिताती है।
मुझे याद है, एक बार मैं वर्षों पूर्व एक स्थान पर सिखा रहा था, और वहाँ पर एक स्त्री पहली पंक्ति में बैठी हुई थी जो पेन्टीकॉस्टल थी और बहुत आत्मिक थी। और ऐसा हुआ है कि मैंने निराशा की आत्मा का नाम लिया और मैंने उसका चेहरा देखा। वह ऐंठने लगी। वह पूरी तरह बदल गई। जब तक वह निराशा की आत्मा से छुड़ाई नहीं गई, उसका पूरा व्यक्तित्व बदला हुआ था। आप देखें, यदि आप किसी चीज पर अपनी आशा रखेंगे और वैसा नहीं होगा तो संभवतः आप दुष्टशक्ति के शिकार हो जाएँगे।
अब दूसरे प्रकार की कमजोरी शारीरिक कमजोरी होती है। मुझे आपको यह उदाहरण देने दीजिए। मैंने मिर्गी के बारे में बताया है कि यह कई बार दुष्टात्मा के द्वारा आता है। कुछ वर्षों पूर्व मेरे और मेरी पहली पत्नी के पास 18 साल की एक लड़की आई। उसने मेरे ऑडियो सुने थे। वह अच्छी तरह जाँची-परखी गई, मिर्गी की बीमार थी और दवाई ले रही थी। परन्तु वह विश्वास करती थी कि यह एक दुष्टात्मा है। वह छुटकारा पाने के लिये हमारे पास आई, तब मैंने और लुदिया ने उसके लिये प्रार्थना किया और हमने महसूस किया कि आत्मा छोड़ कर चली गई है। परन्तु तब प्रभु मुझसे कहता हुआ प्रतीत हुआ, ‘‘तुम्हारा काम पूरा नहीं हुआ है।’’ तो मैंने लड़की से कहा, ‘‘मुझे बताओ, यह सब कैसे प्रारंभ हुआ? क्या यह एक शारीरिक चोट से प्रारंभ हुआ?’’ और उसने कहा, ‘‘हाँ, मेरे सिर पर बेसबॉल से चोट लगी और उसके बाद से यह आक्रमण प्रारंभ हुआ।’’ ‘‘ठीक है।’’ मैंने कहा, ‘‘शारीरिक चोट विशुद्ध रूप से शारीरिक चोट ही थी, परन्तु इससे मिर्गी की आत्मा के लिये द्वार खुल गया।’’ आपने समझा? कमजोरी का स्थान उसके मस्तिष्क में चोट का स्थान था। अब मैंने उससे कहा, ‘‘मैं मानता हूँ कि आत्मा निकल गई है और हमें दरवाजा बन्द कर देना चाहिए।’’ तो मैंने और लुदिया ने उस पर हाथ रखे और उसके मस्तिष्क की चंगाई के लिये प्रार्थना किया। उसके बाद तीन वर्षों तक मैं उसके संपर्क में रहा। उसने फिर कभी दवा नहीं ली, फिर उसे कभी ऐंठन नहीं हुआ। परन्तु मैं यह केवल कमजोरी के एक क्षण या स्थान के उदाहरण के रूप में कह रहा हूँ।
और अन्तिम बात पापमय कार्य या आदतें हैं। यदि आप एक पापमय आदत में बने रहते हैं, तो आप इस बात के लिये सुनिश्चित हो सकते हैं कि जल्द या बाद में यह शैतानी बन जाएगा। पापमय कार्य का एक उदाहरण देने के लिये, मुझे एक बार एक युवा स्त्री के लिये प्रार्थना करना पड़ा था जो फिल्म देखने गई थी। ओझा। वह जानती थी कि उसे नहीं जाना चाहिए। वह गई और उसमें कुछ प्रवेश किया। जिस क्षेत्र के लिये मना किया गया था वहाँ जाने के कारण उसे आना पड़ा और उसे पाप के रूप में अंगीकार करना पड़ा और तब उसने छुटकारा पाया। या एक व्यक्ति अश्लील चलचित्र देखने जाता है और किसी प्रकार का यौन दुष्टात्मा, वासना का प्रवेश करेगा। परन्तु आप तब तक छुटकारा नहीं पाएँगे जब तक आप पाप का अंगीकार नहीं करेंगे जिसने दुष्टात्मा के लिये मार्ग खोला था।
अब हम उस बात पर आते हैं जो सारी बातों का केन्द्र है। छुटकारा किस प्रकार पाएँ? हम सबको यह जानने की आवश्यकता है और मैं आपको सामान्य मूल कदमों की यह सूची देने जा रहा हूँ। मैं यह नहीं कहता कि आपको इन सभी कदमों का पालन करना है, परन्तु मैंने पाया है कि ये वे बातें हैं जो प्रासंगिक हैं।
पहला, दीन बनो। ठीक है? जब मैं दो लिखूँगा तब आप देखेंगे कि मैं यह क्यों कह रहा हूँ।
ईमानदार बनिए। ईमानदार बनने के लिये दीनता की आवश्यकता होती है। मैं लोगों से कहता हूँ, ‘‘अपनी समस्या को कोई परिष्कृत मनोवैज्ञानिक नाम मत दीजिए। उसे उसी नाम से पुकारिए जो वह सच में है। एक कुदाल को कुदाल कहिए, न कि खेती का कोई औजार।’’ ठीक है। यदि यह वासना है तो इसे वासना कहिए। यदि यह घृणा है तो इसे घृणा कहिए। मैं महिलाओं से कहता हूँ, आप उसे उसी नाम से पुकारिए जिस नाम से आप उसे अपने पति के सामने पुकारते हैं और वह सही नाम होता है। परन्तु इसमें दीनता की आवश्यकता है। ठीक है? आप तब तक सच्चाई का सामना नहीं करते हैं जब तक स्वयं को दीन नहीं करते हैं। और स्मरण रखिए, बाइबल हमेशा हम पर दीन बनने का उत्तरदायित्व देता है। यह हमेशा कहता है, ‘‘स्वयं को दीन बनाएँ।’’ आपको दीन बनाने के लिये परमेश्वर से प्रार्थना मत कीजिए क्योंकि वह आपको विनीत करेगा। तब आपको दीन होना ही पड़ेगा। परन्तु यह आपका निर्णय है।
इसी प्रकार आप देखते हैं। यदि आप छुटकारे की खोज कर रहे हैं तो ऐसा क्षण आ सकता है, जहाँ आपको दो बातों के मध्य चुनाव करना होगा: आपका सम्मान और आपका छुटकारा। अब यदि आपके लिये छुटकारे की अपेक्षा सम्मान अधिक महत्वपूर्ण है, आप जानते हैं कि आपकी समस्या क्या है? घमण्ड। हाँ, यही है। मैं अल्बामा प्रान्त की इस चिकित्सक की पत्नी के बारे में सोचता हूँ। वह दक्षिणी शैली वाली स्त्री थी। उसने मुझे सिखाते हुए सुना और वह सामने आई और उसने कहा, ‘‘मिस्टर प्रिन्स, यदि मैं समझती कि आप क्या कह रहे हैं, यदि मैं छुटकारा पाती तो मैं चीखती।’’ मैंने कहा, ‘‘यह हो सकता था।’’ उसने कहा, ‘‘मैं एक ऐसी महिला के रूप में बढ़ी थी जो कभी जनसाधारण के सामने नहीं चीखती।’’ ‘‘ठीक है।’’ मैंने कहा। ‘‘मान लीजिए, आप एक नदी में डूब रही हों और आप तीसरी डूबकी ले रही हैं और आप सोचती हैं कि किनारे पर कोई है जो आपको बचा सकता है, तो क्या आप स्त्री सहज स्वाभाव से नहीं चीखेंगी? ठीक है, यह एक विकल्प है। या तो आप डूबने का चुनाव कर सकते हैं या फिर आप पाँच मिनट के लिये साधारण महिलाओं के जैसे हो सकती हैं।’’ लोगों के लिये मेरा सलाह यह है कि अपना सम्मान जाने दो, क्योंकि वह वापस आ जाएगा। और जब आप छुटकारा पा लेते हैं तो आप कहीं अधिक सम्मान पायेंगे। आपके भीतर यह बात नहीं होगी जो हमेशा संघर्ष करता है। ठीक है। परन्तु मैं सच में कहता हूँ कि दीनता कुन्जी है।
अगली बात मसीह में अपनी विश्वास का अंगीकार करना है। क्योंकि वह हमारे अंगीकार का महायाजक है। जब हम अंगीकार करते हैं तब वह हमारी सहायता के लिये आता है। परन्तु यदि हम सही अंगीकार नहीं करते हैं तो हम उसे दृश्य में नहीं पाते हैं।
चौथा, कोई भी ज्ञात पाप का अंगीकार कीजिए। ठीक है (बोर्ड पर लिखते हुए)। मैं यहाँ पर वैसा ही लिखूँगा: ‘‘कोई भी ज्ञात पाप।’’ और मैं लिखना चाहता हूँ परन्तु इस पंक्ति में स्थान नहीं है। ‘‘आपके द्वारा या आपके पूर्वजों के द्वारा’’ कुछ मामलों में आपको पारिवारिक समस्याओं में अपने आपको शामिल करना पड़ता है और कहते हैं, ‘‘यह मेरी समस्या है, मैं इसका अंगीकार करता हूँ, मैं क्षमा माँगता हूँ।’’ भले ही वह आपकी दादी या आन्टी या कोई और हो।
पाँचवाँ, सभी पापों का अंगीकार करें। बिना पश्चाताप के, जो बात अब तक हम कह रहे थे उसे स्मरण कीजिए, बिना पश्चाताप के छुटकारा नहीं है। और मैं यहाँ नीतिवचन 28ः13 पढ़ूँगा जो कहता हैः
‘‘जो अपने अपराध छुपा रखता है, उसका कार्य सुफल नहीं होता, परन्तु जो उसको मान लेता और छोड़ भी देता है, उस पर दया की जाएगी।’’
क्या आप दया चाहते हैं? आपको दो बातें करना है: अंगीकार करें और छोड़ दें। यह पुरातन विचार है, परन्तु परमेश्वर नहीं बदला। आप समझे? बहुत से लोग यह विचार रखते हैं। ‘‘यदि मैं अपने पाप का अंगीकार न करूँ तो परमेश्वर को कभी उसके बारे में पता नहीं चलेगा।’’ सच में। मैं बहुत से लोगों से मिला हूँ। यह एक गलती है। परमेश्वर पहले से जानता है। वह आपसे इसलिये अंगीकार करने के लिये नहीं कह रहा है कि उसे पता चले। वह आपसे इसलिये अंगीकार करने के लिये कह रहा है ताकि वह आप पर करुणा कर सके, समझे? और मुझे आपको कुछ और शुभसन्देश बताने दीजिए। परमेश्वर कंपनयोग्य नहीं है। आप अपनी बुरी से बुरी बात भी उसे बता सकते हैं। उसे पहले से वह मालूम है और वह अब भी आपसे प्यार करता है। परन्तु यदि आप उसे थामे रहते हैं तो आपने अपनी समस्या को अपने भीतर ही रखा हुआ है।
ठीक है। छठवाँ, मनोगत बातों, श्रापों को (जिस पर आज रात हम विचार करने जा रहे हैं। मैं अभी उस पर जा नहीं सकता।) और गुप्त समाजों को तोड़ डालिए। ठीक है। विशेष कर मुफ्त चिनाई। यह सबसे बड़ी दुष्टात्मा की समस्या का मूल है और यह पीढ़ी से पीढ़ी तक चलता रहता है, जिसमें मंदता, विकलांगता और हर प्रकार की समस्या शामिल है। सच में यह पश्चाताप का भाग है परन्तु मैंने इसे अलग से रखा है।
सातवाँ, दूसरों को क्षमा कीजिए। सबको, हर किसी को। वर्षों पूर्व डॉन बोशाम और मेरा एक मित्र था जो कि एक पशुचिकित्सक था। उसे छुटकारे की आवश्यकता थी परन्तु उसे तब तक छुटकारा नहीं मिला जब तक उसने संपूर्ण आई.आर.एस. को माफ नहीं किया। यह उसकी समस्या थी। मुझे निश्चय है, कि आपमें से किसी की ऐसी समस्या नहीं है। मरकुस 11ः25 में यीशु ने कहा, ‘‘जब कभी तुम खड़े हुए प्रार्थना करते हो, यदि तुम्हारे मन में किसी की ओर से कुछ विरोध हो, तो क्षमा करो।’’ वह किसी को भी और किसी भी वस्तु को नहीं छोड़ता है। क्षमा करना आपका कर्तव्य है। आप तब तक इन्तजार नहीं करते हैं जब तक वे अपने आपको दीन करें और कहें, ‘‘मैं सच में उस बात के लिये खेदित हूँ जो मैंने किया है।’’ प्राथमिक रूप से आप उनके लिये उन्हें क्षमा नहीं करते हैं, परन्तु अपने लिये। मैं लोगों से कहता हूँ, ‘‘दूसरों को क्षमा करना अति आत्मिक होना या भावनात्मक होना नहीं है, यह साधारण, प्रबुद्ध स्वहित है।’’
और आठवाँ, एक सुन्दर संक्षिप्त शब्द, त्याग दो। कुछ समय बाद हम उस पर आएँगे परन्तु अक्रियता आपको कहीं नहीं ले जाती है। आपको कदम उठाना होगा। सबसे सरल कार्य यह करना है कि साँस बाहर निकालना प्रारंभ करें। इब्रानी और यूनानी दोनों भाषाओं में आत्मा के लिये वही शब्द है जो श्वास के लिये है। मुझे एक छोटे लड़के-या उसकी माँ की याद आती है जो मेरे पास आई और अपने चार या पाँच साल के बेटे के लिये प्रार्थना करने के लिये कहा। मैंने कहा, ‘‘इसकी समस्या क्या है?’’ उसने कहा, ‘‘एलर्जी।’’ ‘‘किस प्रकार की एलर्जी?’’ ‘‘भोजन की एलर्जी।’’ ‘‘उसे किस चीज से एलर्जी है?’’ ‘‘यह पूछिए कि किस चीज से एलर्जी नहीं है।’’ ‘‘ठीक है।’’ मैंने कहा। ‘‘मुझे आपके बेटे से बात करने की आवश्यकता है।’’ मैंने उससे बालसुलभ भाषा में बात किया और कहा, ‘‘श्वास के समान ही तुम्हारे भीतर एक बुरी आत्मा है। मैं यीशु के नाम से उसे बाहर निकलने की आज्ञा देनेवाला हूँ। मैं चाहता हूँ कि तुम उसे जाने दो। तो जब मैं ‘‘यीशु के नाम से’’ कहूँ तो तुम बाहर की ओर फूँकना।’’ तब वह एक सैनिक के समान हो गया। उसके लिये कुछ समय तक प्रार्थना किया और कहा, ‘‘यीशु के नाम से।’’ और वह निकल गया। बस हो गया। तो मैंने सोचा, कुछ हुआ कि नहीं। तो मुझे इसे प्रभु पर छोड़ देना था। परन्तु तीन दिनों के बाद वह स्त्री वापस आई और उसने कहा, ‘‘मेरे लिये प्रार्थना कीजिए!’’ मैंने कहा, ‘‘आपकी क्या समस्या है?’’ उसने कहा, ‘‘एलर्जी।’’ मैंने कहा, ‘‘पहले मुझे बताइए कि आपके बेटे का क्या हुआ।’’ उसने कहा, ‘‘ठीक है। वह सीधे घर गया, फ्रिज खोला और उसमें जो कुछ था सब में से थोड़ा थोड़ा चखा और उसे कुछ भी हानि नहीं हुआ। देखो कितना सरल है?’’ एक नन्हे शिशु के समान हुए बिना आपको ये लाभ नहीं मिलेंगे।
ठीक है। उन्हें बाहर निकालने का अब यही तरीका है। यह सूचना का सबसे महत्वपूर्ण अंश है और यदि यह आपको समझ में न भी आए कि वे भीतर कैसे आए, तो यह जानना महत्वपूर्ण है कि उन्हें बाहर कैसे निकालें। धन्यवाद।
अब हम समस्या के क्षेत्र में जा रहे हैं। क्यों कुछ लोगों को छुटकारा नहीं मिलता है? यह मुख्यतः उन लोगों के लिये है, जो इस सेवा में होने जा रहे हैं। क्यों कुछ लोगों को छुटकारा नहीं मिलता है? मूल रूप से यह शर्तों को पूरा न करने के कारण है। सुनिए, छुटकारा आपके आत्मिक सामर्थ्य की अधिक परख नहीं है; यह इस बात की परख है कि क्या लोगों ने शर्तों को पूरा किया है। अपने ऊपर ध्यान मत लगाइए, लोगों पर ध्यान दीजिए कि वे शर्तों को पूरा करें। चूँकि एक बार उन्होंने शर्तों को पूरा किया, वे छुटकारा पाएँगे। आप स्वयं को बहुत बौना महसूस कर सकते हैं, परन्तु आप एक विजयी मसीह का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
ठीक है। पहला, पश्चाताप की कमी। ठीक है। उनके लिये कोई ग्यारन्टी नहीं है जो मनफिराने की इच्छा नहीं कर रहे हैं।
दूसरा, साहस की कमी। मैं कहता हूँ कि छुटकारा साहसी लोगों के लिये है। मैं अक्सर लोगों से कहता हूँ, ‘‘आप कब वापस आएँगे और साहस करेंगे’’ - साहस, धन्यवाद। साहस की कमी। सब कुछ एक शब्द में कहा जा सकता है, अक्रियता। आप विशेष करके उन लोगों में पाएँगे जो पूर्वी गलत शिक्षाओं का पालन करते रहे हैं। वे आपको उत्साहित करेंगे कि अपने मन को तटस्थ रखें। आपने समझा? और बहुत बार आप ऐसा कुछ कर सकते हैं जिससे उन्हें ठेस लगे। मैं पुनः कहना चाहता हूँ, मसीह ने हमें दुष्टात्माओं पर अधिकार दिया है। परन्तु मनुष्य की इच्छा पर नहीं। आप दूसरे व्यक्ति के लिये इच्छा नहीं कर सकते हैं। उस व्यक्ति को अपने लिये इच्छा करना होगा।
तीसरा, गलत उद्देश्य। ठीक है। यहाँ मैं आपको जो पद बताऊँगा वह याकूब 4ः3 है, जो कहता है, ‘‘तुम माँगते हो पर पाते नहीं, इसलिये कि बुरी इच्छा से माँगते हो।’’ हम केवल उस मकड़जाल से बाहर निकलने के लिये छुड़ाये नहीं जाते हैं। बहुत से लोग मकड़जाल से छुटकारा चाहते हैं। हमने इसलिये छुटकारा पाया है, ताकि प्रभु की सेवा करें। वे लोग जो केवल छुटकारे के लिये आते हैं वे छुटकारे की शर्तों को पूरा नहीं करते हैं।
चौथा, (अच्छा होगा कि आप इस सूची में जाएँ और जब हम इस पर आगे बढ़ेंगे तो स्वयं को जाँचें।) आत्म-केन्द्रित होना। ठीक है। ध्यान पाने की अभिलाषा। कुछ लोग छुटकारा नहीं पाते हैं क्योंकि तब वे ध्यान का केन्द्र नहीं रह जाएँगे, आपने समझा? आप पाएँगे कि छुटकारे के कुछ एक जटिल मामले कभी भी छुटकारा नहीं चाहते हैं क्योंकि वे गरीब, तिरस्कृत और त्यागे गए लोग हैं। यही एक मात्र समय है जब वे मंच के केन्द्र में आते हैं। दुष्टात्मा ग्रसित सभी लोगों के बारे में एक बात आप जो ध्यान देंगे वह यह है कि किसी न किसी प्रकार वे आत्म-केन्द्रित होते हैं। वास्तव में, आत्म-केन्द्रित होना दुष्टात्मा के ध्यान को आकर्षित करने का आमन्त्रण है। कई बार आपको व्यक्ति को जाने देना और कहना पड़ता है, ‘‘सुनो, तुमने बहुत सुन लिया है। तुम स्वयं यह कर सकते हो और यदि तुम यह नहीं करते हो, तो कोई भी तुम्हारे लिये यह करने वाला नहीं है।’’
पाँचवाँ, मनोगत आदि के साथ टूटने में पराजय। और इसमें मनोगत की वस्तुओं से छुटकारा शामिल है। ठीक है? जैसे कि छोटा बुद्ध या चार्म्स या घोड़े की नाल-कोई भी बात जो अंधविश्वास को बढ़ावा देता है वह दुष्टात्मा की ओर से है। मूसा ने इस्राएल से कहा, ‘‘यदि तुम अपने घर में एक श्रापित वस्तु को लाओगे तो तुम उस वस्तु के समान श्रापित हो जाओगे।’’ बहुत से मसीहियों को अपने घरों को देखने और बहुत सारी बेकार की वस्तुओं को बाहर निकाल कर साफ करने की आवश्यकता है। मैं इसे एक सिद्धान्त बनाता हूँ। मैं अपने घर में ऐसी कोई बात नहीं रखना चाहता हूँ जो यीशु मसीह का अनादर करे या शैतान का आदर करे।
मेरे जीवन के बड़े कर्मों में से एक यह था कि मैंने अपने दादा से कपड़े पर बने चार सुन्दर चीनी ड्रैगन-चार नहीं, पाँच पंजों वाला शाही ड्रैगन पाया था। और वे सुन्दर थे। और वे वास्तव में आराधना की वस्तुयें नहीं थीं परन्तु जितना अधिक मैंने उसके विषय में सोचा मैं सोचता रहा। ड्रैगन वास्तव में शैतान का चित्र है। मैं अपने घर की दीवारों पर उसका विज्ञापन नहीं दे सकता हूँ। इसलिये मैंने उन्हें निकाल दिया और उससे छुटकारा पाया। और मुझे कहना है कि मेरी ऐसी योजना नहीं थी। मुझे इसकी जरूरत नहीं थी। मेरे मन में ऐसी कोई प्रेरणा नहीं थी, परन्तु मैंने अवलोकन किया। जब मैंने ड्रैगन को अपने घर से बाहर निकाल दिया तो मैंने पूरी तरह नई रीति से समृद्धि पाया।
ठीक है। छठवाँ, दुष्ट, प्राणिक संबन्धों से पृथक होने में असफल। कभी कभी यदि कोई संबन्ध बुरा है, यदि बन्धन में डालनेवाला है, यदि वे-मुझे नहीं मालूम क्या कहना है, मैं एक शब्द चिपचिपा है कहना चाहता हूँ, तो आपको उसको तोड़ना होता है। एक प्रकार का चिपचिपा भावुकता जो ईमानदार नहीं है।
ठीक है। सातवाँ, एक श्राप के अधीन। अब हम आज रात उस पर विचार करने जा रहे हैं इसलिये अभी मैं उस पर नहीं जाऊँगा, परन्तु कुछ लोग श्राप के अधीन हैं और तब तक वे छुटकारा नहीं पाएँगे जब तक श्राप नहीं टूटेगा।
आठवाँ, (मेरे पास समय की कमी है) एक विशेष पाप का अंगीकार न कर पाना। जैसे कि एक प्रगट उदाहरण गर्भपात का है। जिस किसी ने जान बूझकर गर्भपात किया है परमेश्वर की दृष्टि में हत्या का अपराधी है और इसे विशेषकर हत्या के रूप में अंगीकार किया जाना है। अब यह मेरा निर्णय नहीं है, मैं नियम नहीं बना रहा हूँ। आपने समझा? मैं केवल उसकी व्याख्या कर रहा हूँ। मैंने प्रयास किया है कि लोग छुटकारा पाएँ। आप दुष्टात्मा को अधिक से अधिक गले तक ले जा सकते हैं परन्तु वह बाहर नहीं आता। ठहरिए और जाँचिए। मुझे सोलह साल की एक लड़की याद आती है उसकी माँ उसे लेकर आई थी। क्रमशः मैंने कहा, ‘‘सुनो, इसके बाहर आने से पहले तुम्हें कुछ अंगीकार करना है।’’ और उसने क्रमशः अंगीकार किया, उसने गर्भपात कराया था। उसकी माँ उसके बारे में नहीं जानती थी। जैसे ही उसने अंगीकार किया, वह बाहर आई। यह देखना बहुत मधुर था कि माँ और बेटी एक दूसरे से गले मिले और एक दूसरे को स्वीकार किया। परन्तु मेरे विचार से यह एक अटल सिद्धान्त है।
नौवाँ, यह विवादास्पद है-अनुमान लगाइए, क्या है? नया नियम में अलग करनेवाला संस्कार क्या है? बपतिस्मा, वह सही है। जल का बपतिस्मा। ठीक है। स्मरण रखिए, मिस्र में इस्राएली मेम्ने के लहू से छुटकारा पाया था। परन्तु वे लाल समुद्र के जल द्वारा मिस्र से पृथक हुए थे। और यह पानी ही था जिसने मिस्रियों को उनका पीछा करने से रोका था। जहाँ तक पानी ने अनुमति दिया वहाँ तक वे पीछा कर सके। वे लोग जो जल का बपतिस्मा नहीं लेना चाहते हैं मेरे विचार से स्वतन्त्र रहने के योग्य नहीं हैं। यह एक विकल्प नहीं है, मैं इसे एक संप्रदाय के मुद्दे के रूप में नहीं देख रहा हूँ। मैं केवल इसलिये यह कह रहा हूँ क्योंकि यह ऐसा ही है। यदि आप परमेश्वर को मना लेंगे तो ठीक है। परन्तु मैं उस सहमति का एक पक्ष नहीं बनने वाला हूँ।
ठीक है। दस। अब यह बहुत ही जटिल बात है। बड़े युद्ध के भाग के रूप में मिल जुल कर कदम उठाने की आवश्यकता होती है। ठीक है। कुछ लोग ‘‘शैतान की रणभूमि’’ होते हैं और वह उन्हें जाने नहीं देगा। इसलिये नहीं कि वे अपने आप में क्या हैं, परन्तु इसलिये कि वे किस बात के लिये खड़े हैं। उस पर विचार करने के लिये मेरे पास समय नहीं है। परन्तु ऐसे लोग होते हैं जिनके लिये पूरी देह को उत्तरदायित्व लेना पड़ता है। आपको एक उदाहरण देने के लिये मैं एक युवा व्यक्ति को जानता था जिसे श्वेतरक्तता की बीमारी थी। आप जानते हैं यह ठीक नहीं होता है; यह समय की बात होती है। वह एक संगति का हिस्सा था। जब संगति तरक्की पर थी तो उसने अच्छा किया, वह बीमार नहीं था। यदि संगति के साथ कुछ भी गलत होता तो वह बीमार पड़ जाता और अन्ततः शैतान संगति में प्रवेश कर गया, उसे विभाजित किया और नाश कर दिया और वह मर गया। आपको समझ में आया? जिस कलीसिया में वह था उसकी आत्मिक दशा का सटीक मापक उसकी शारीरिक दशा थी। ऐसे लोग होते हैं। आपके पास विकल्प नहीं हैं।
ठीक है, एक अन्तिम विषय, अपने छुटकारे को किस प्रकार बनाए रखना है। ठीक है। अक्सर यह सिखाने के लिये मेरे पास समय नहीं होता है। मुझे कहने दीजिए कि मेरे पास ‘‘छुटकारा और शैतान का सिद्धान्त’’ शीर्षक से छः कैसेट हैं जो आप सब के लिये उपलब्ध हैं। अन्तिम कैसेट ‘‘अपने छुटकारे को बनाए रखने के सात तरीके हैं।’’
पहला, यीशु को प्रभु बनाइये, ठीक है? सामान्यतः छुटकारे की सेवा के अंत में मैं छुड़ाये गये लोगों से कहूँगा, ‘‘तब तक इस ऑडिटोरियम से बाहर मत जाइये जब तब आप यीशु को अपने जीवन के हर क्षेत्र में प्रभु न बना लें।’’ स्मरण रखिये, कि यीशु ने मत्ती 12 में क्या कहा, ‘‘उस व्यक्ति में से अशुद्ध आत्मा बाहर कब गई?’’ वह विश्राम की खोज में सूखे स्थानों में जाती है। तब वह कहती है, मैं अपने घर वापस जाऊँगी। मेरे घर से उसका तात्पर्य क्या है? जिस व्यक्ति पर उसने कब्जा किया हुआ है? और जब वह आता है तो वह तीन बातें पाता हैः खाली, झाड़ू मारा हुआ और व्यवस्थित। समस्या क्या है? घर साफ करने में कुछ भी बुरा नहीं है; घर को व्यवस्थित करने में कोई समस्या नहीं है। तो फिर समस्या क्या है? खाली। कोई नहीं रहता, किसी और को भीतर जाने नहीं दिया। केवल एक ही व्यक्ति आपके जीवन से शैतान को बाहर रख सकता है। आप जानते हैं कि वह कौन है? यीशु। जिस क्षेत्र में यीशु प्रभु नहीं है वह असुरक्षित है। क्या आपने कभी शाम को छः या सात बजे रात बिताने के लिए एक मोटेल की तलाश में संयुक्त राज्य अमेरिका में यात्रा किया है? आप लाल नियोन बल्ब की रोशनी में एक शब्द खोज रहे हैं, वह क्या है? किराये से देना है। यह सही है। और जब आप यह देखते हैं, तो आप समझ जाते हैं कि आप भीतर प्रवेश कर सकते हैं। ठीक है, आध्यात्मिक दुनिया में, आपके अपने व्यक्तित्व के किसी भी क्षेत्र में, जिसे पूरी तरह से यीशु के आधिपत्य में नहीं दिया जाता है, वह लाल नियोन बल्ब का चिन्ह है, किराये पर देना है। और दुश्मन जानता है, कि उसका स्वागत है। और जब वह भीतर आता है तो वह अपने साथ खुद से भी बदतर सात अन्य लोगों को लाने के लिए उत्तरदायी है।
ठीक है। दूसरा। मैं तो बस संक्षेप में प्रशंसा के परिधान बताने जा रहा हूँ। धर्मशास्त्र कहता है कि परमेश्वर ने हमें भारीपन की आत्मा के स्थान पर प्रशंसा के वस्त्र दिया है, ठीक है? आप देखें, जब आप प्रभु की स्तुति कर रहे हैं, तो आप शैतान को कहीं अधिक परेशान कर रहे हैं जितना वह आपको कर सकता है। मुझे इसे संक्षिप्त में संबंधित करने दीजिये।
वर्षों पूर्व मैं उद्धार की सेवा में आ गया था, जब मैं लंदन में एक साधारण प्रकार की पेंटेकोस्टल चर्च में पासबानी कर रहा था। कलीसिया में दो रूसी यहूदिनी थीं जो चमत्कारिक रीति से रशिया से भाग गयी थीं, उद्धार पायीं और पवित्र आत्मा में बपतिस्मा पाया था। और मेरी पहली पत्नी और मैं उन लोगों के साथ प्रार्थना कर रहे थे और वे वास्तव में प्रभु की स्तुति करने में विश्वास करते थे। मेरा मतलब है, वे मितभाषी नहीं थे। उन्होंने कहा, ‘‘रशिया में बैप्टिस्ट लोग रशिया के बाहर के पेंटिकोस्टलवादियों की तुलना में ज्यादा जोर से प्रभु की स्तुति करते हैं।’’ और इसलिए वहाँ हम प्रभु के साथ एक अच्छा समय बिता रहे थे और वहाँ पर घंटी पर एक छल्ला था और जब मैं उसका उत्तर देने के लिये वहाँ गया तो वहाँ मेरी कलीसिया की एक महिला सदस्य थी जो अपने हाथ से अपने पति को रास्ता दिखा रही थी। और उसने कहा, ‘‘यह मेरा पति है, वह अभी जेल से बाहर आये हैं, उनमें दुष्टात्मा है।’’ यह मेरे लिए अनिष्ट खबर थी क्योंकि मुझे नहीं पता था कि दुष्टात्मा के होने पर क्या करना है। लेकिन उस आदमी को मना नहीं कर सकता था, इसलिए मैं उस युगल को वहाँ ले गया जहाँ हम सभी प्रार्थना कर रहे थे। और मैंने कहा, ‘‘हम प्रार्थना करेंगे।’’ यह बचने का सबसे अच्छा तरीका है। प्रार्थना करना हमेशा आत्मिक होता है। कभी कभी यह कोई भी परिणाम नहीं लाता है, लेकिन कम से कम आप अच्छे प्रतीत होते हैं! इसलिए हम प्रार्थना करते रहे और इन रूसी बहनों ने किसी की परवाह नहीं की, वे प्रभु की स्तुति कर रहे थे। तो यह आदमी मेरी ओर खिसका और उसने कहा, ‘‘बहुत ज्यादा शोर है; मैं जा रहा हूँ!’’ ठीक है, मैंने उत्तर पहले से सोच कर नहीं रखा था, लेकिन मैंने उसे सही जवाब दिया। मैंने कहा, ‘‘देखो, जिसे शोर पसंद नहीं है, वह शैतान है, क्योंकि हम यीशु की तारीफ कर रहे हैं। आपके पास दो विकल्प हैं। यदि अभी आप जायेंगे तो शैतान आपके साथ जायेगा। अगर आप रह जाते हैं तो शैतान आपके बिना जायेगा।’’ उसने कहा, ‘‘मैं रुकूँगा।’’ और लगभग दस मिनट बाद बिना कुछ विशेष घटे वह मेरे पास आया और कहा, ‘‘वह चला गया। मैंने महसूस किया कि उसने मेरे गले को छोड़ दिया।’’ यह मेरे लिये एक ऐसा प्रदर्शन था, कि शैतान यीशु की प्रशंसा को कितना अधिक नापसंद करता है। यदि आप प्रशंसा के परिधान पहनेंगे तो वह आप से दूर रहेगा, क्योंकि जितना वह आप को शर्मिंदा कर सकता है उससे कहीं अधिक आप उसे शर्मिंदा करेंगे।
तीसरा, परमेश्वर के पूरे हथियार बाँध लो। वह एक विकल्प नहीं है। इफिसियों 6ः14-17, और यह 12 से शुरू होता है। ठीक है। तो यह आप सभी के लिए सूचीबद्ध है, मुझे आप सभी को इसके बारे में बताने की जरूरत नहीं है।
चौथा, परमेश्वर के वचन के अनुसार जीवन बिताईये। मत्ती 4ः4 क्या कहता है? ‘‘मनुष्य केवल रोटी से ही नहीं परन्तु हरेक वचन से जो परमेश्वर के मुँह से निकलता है जीवित रहेगा।’’ आप अपनी भावनाओं से नहीं जी सकते हैं। यही सबसे खतरनाक बात है जो आप कर सकते हैं। आप ऊपर और नीचे होंगे और हर बार आप एक बुरे मूड में होंगे; आपने द्वार खोला है। तीन बातों की एक सूची हैः तथ्य, विश्वास, भावनायें। ठीक है। अब आपको उन्हें उस क्रम में रखना है। तथ्य परमेश्वर के वचन में होते हैं। विश्वास तथ्य पर विश्वास करता है। और भावनायें सही क्रम में आ जाती हैं। परन्तु यदि आप क्रम को उल्टा करें, और अपनी भावनाओं के अनुसार रहने लगें तो आप अपना सब्र खो देंगे। आप लंगर के बिना भटकते जहाज के समान हैं।
पाँच, परमेश्वर को समर्पित हों और क्या? शैतान का विरोध करें, हाँ, यह ठीक है। मैं शैतान लिखूँगा क्योंकि यह लिखने के लिए छोटा है। याकूब 4ः7 कौन सा है। ध्यान दें कि कौन सा पहले आता है, आपको पहले क्या करना है? परमेश्वर को समर्पित करें। यदि आपने परमेश्वर को समर्पित किया है और आप तब शैतान का सामना करते हैं, तो बाइबल क्या कहती है कि होगा? वह क्या करेगा? आप से भागेगा। क्या आप यह विश्वास करते हैं? लेकिन कई सारे बिल्कुल ही उल्टा कर रहे हैं। वे शैतान को समर्पित हो रहे हैं और परमेश्वर का सामना कर रहे हैं? वास्तव में, कई हैं।
ठीक है। छह, मैं सही संगति कहूँगा। मैं और अधिक नहीं कह सकता हूँ। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस तरह की संगति में हैं। पहला यूह. 1ः7, ‘‘यदि हम ज्योति में चलें तो जैसा कि वह ज्योति में हैं।’’ तो क्या होता है? ‘‘हम संगति में हैं।’’ अगर आप संगति से बाहर हैं तो आप ज्योति से बाहर हैं। आप लहू द्वारा सुरक्षित किये गये नहीं हैं। लहू केवल ज्योति में ही शुद्ध करता है। और आप किसी न किसी प्रकार की संगति में प्रवेश करने जा रहे हैं, यह कौन सी होने वाली है? धर्मी या धर्मभ्रष्ट के साथ? पौलुस कहते हैं, ‘‘अंधकार के निष्फल कामों के साथ संगति मत करो।’’ संगति इस बात का एक अम्ल परीक्षण है कि आप अपने आध्यात्मिक जीवन में कहाँ हैं।
सात, मैं नहीं जानता कि मुझे कितना मिला। क्या मैं उन सबको प्राप्त कर सकता हूँ? हाँ, मैं पा सकता हूँ। अनुशासन के तहत आओ। बिल्कुल ठीक। बिना अनुशासन के आप एक वास्तविक मसीही नहीं हो सकते। अनुशासन के कई क्षेत्र हैं। लेकिन जो मना करता है वह विद्रोही है। और आप जानते हैं कि विद्रोहियों के बारे में बाइबल क्या कहती है? पहला शमूएल 15ः23, ‘‘विद्रोह जादू टोना है।’’ जिस पल आप विद्रोही बनते हैं, आप उसी पल जादू टोने की आत्मा के अधीन हो जाते हैं। ठीक? अनुशासन। क्या आपको समझ में आया? कई लोगों के लिए आज यह एक गंदा शब्द है। यह आत्म अनुशासन के साथ शुरू होता है, आप समझते हैं? अधिकांश मसीही अपने मूड और अपनी सनक और अपनी पसंद आपस में मिला देते हैं। यह करने के लिये आप स्वतंत्र नहीं हैं। यह करना उतना खतरनाक है जितना अपने यौन आवेगों को तृप्त करने में लगे रहना। आप यह करने के लिये स्वतंत्र नहीं हैं।
आठ, यह अंतिम है। यीशु को केन्द्र बनाइये। ठीक है? आप देखेंगे कि यीशु के साथ प्रारंभ और अंत होता है। और मैं एक पद बताने जा रहा हूँ, यूह. 12ः31 और 32। जो कहता हैः
‘‘अब इस जगत का न्याय होता है, अब इस जगत का सरदार निकाल दिया जायेगा। और मैं यदि पृथ्वी पर से ऊंचे पर चढ़ाया जाऊँगा, तो सब को अपने पास खींचूँगा।’’
क्रम पर ध्यान दीजिए। जब शैतान बाहर निकाला जाता है, तो अगला क्या काम करना है? यीशु को ऊँचा उठाईए। ठीक है। रिक्त स्थान को यीशु से भरिए। शैतान को बाहर निकालने से रिक्तता आती है। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आप उस खाली स्थान को सही चीज से भरिए। यीशु पर ध्यान केन्द्रित कीजिए। दुष्टात्माओं पर ध्यान केन्द्रित मत कीजिए। शैतान का बहुत अधिक प्रचार मत कीजिए, उसे यह पसन्द है। दुष्टात्मायें कीटाणुओं और वायरस की तरह होती हैं। हमें उन्हें पहचानना है; हमें उसका समाधान ढूँढ़ना है। परन्तु एक स्वस्थ व्यक्ति हमेशा कीटाणुओं और वायरस के विषय में सोचता नहीं रहता। आपको समझ में आया? स्वास्थ्य, एक प्रकार से उन्हें बाहर करता है। हर चाय की प्याली में दुष्टात्मा को मत ढूँढिए। यदि आप किसी प्राचीन या कम प्राचीन कलीसिया से हैं तो वापस मत जाइए। अपने पासबान के पास जाइए, उनकी दोनों आँखों के मध्य उँगली गड़ाइए और कहिए, ‘‘आपमें दुष्टात्मा है!’’ समझे? यह सही हो सकता है परन्तु यह उचित समय नहीं है।
ठीक है। अब हमने समय का अच्छा उपयोग कर लिया है और एक बहुत ही व्यवहारिक टिप्पणी के साथ मैं इसे समाप्त करना चाहता हूँ। बहुत धन्यवाद। यह वैकल्पिक है। मैं चाहता हूँ कि आप समझें, किसी पर दबाव नहीं है। परन्तु यदि आज सुबह यहाँ ऐसे लोग हैं या इस दोपहर को, जो कुछ उन्होंने सुना या पूर्व के अनुभवों के आधार पर यह महसूस करते हैं कि आपमें समस्या है। दुष्टात्मा की समस्या। आपके जीवन में एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें यीशु का नियन्त्रण नहीं है और आप उसके नियन्त्रण में नहीं हैं। हो सकता है आप 90 प्रतिशत नियन्त्रण में हों परन्तु 10 प्रतिशत न हों। यह आपका स्वभाव या मन हो सकता है। यह आपका यौन जीवन हो सकता है। यह दूसरों के साथ आपका संबन्ध हो सकता है। एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ आपको छुटकारा चाहिए। मैं आपकी सहायता करना चाहता हूँ। मैंने सहायता किया है। मैं कह सकता हूँ कि मैं सोचता हूँ, मैं ईमानदारी से सैकड़ों हजारों लोगों के विषय में सोचता हूँ। यह काम करता है। जो मैं आपके करने के लिये देना चाहता हूँ वह आपमें से जो महसूस करते हैं कि सहायता चाहिए उन्हें मैं कुछ ही क्षणों में बुलाना और एक प्रार्थना करवाना चाहता हूँ। आप मुझसे प्रार्थना नहीं करेंगे आप यीशु से प्रार्थना करेंगे। स्मरण रखिए, केवल एक ही मुक्तिदाता है। उसका नाम क्या है? यीशु। यदि आप छुटकारा चाहते हैं तो आपको मुक्तिदाता के पास आना पड़ेगा और कोई रास्ता नहीं है। यीशु ने कहा, ‘‘जो कोई मेरे पास आता है, मैं उन्हें बाहर नहीं निकालूँगा।’’ यदि आप आएँगे, तो वह आपका स्वागत करेगा। अब यह एक ऐसी विधि है जिसे मैंने बड़ी भीड़ में लागू किया है। वेलिन्गटन, न्यूजीलैण्ड में पुराने टाउन हॉल में दो सप्ताह पूर्व हमारे पास कम से कम दो हजार लोग एकत्रित थे और दो हजार लोगों में यह काम किया। नाटकीय रूप से यह अच्छा हुआ। मैंने कभी भी इतने छोटे समय में इतनी बड़ी भीड़ को छुटकारा पाते हुए नहीं देखा था। तो मैं यह करने जा रहा हूँ, अब यह एक प्रस्ताव है। मैं आपको एक प्रार्थना करवाना चाहता हूँ जिसमें आपको स्वयं को दीन करने, यीशु के पास आने और यह कहने का अवसर होगा आपने शर्तों को पूरा कर लिया है। आप समझे? मैं आपके मुँह में शब्द दूँगा। आप हर प्रकार की गलत शिक्षा और शैतान की शक्ति के साथ हर प्रकार के संपर्क को मानेंगे। आप हर अन्य व्यक्ति को माफ करेंगे जिसने आपको हानि पहुँचाया है या आपके साथ गलत किया है। आप अपने जीवन पर के हर श्राप से स्वयं को मुक्त करेंगे और आपको बिना समझे विश्वास में यह करना है। और तब आप स्वयं को यीशु के सामने छुटकारे के लिये एक उम्मीदवार के रूप में प्रस्तुत करेंगे। और जब आप यह प्रार्थना कर चुके और सारी शर्तों को पूरा कर लें और अन्तिम शब्द जो आपको कहना है, वह आमीन है। ठीक है? जब आपने आमीन कह दिया, तो और अधिक प्रार्थना मत कीजिए। प्रार्थना करना बहुत धार्मिक बात है। सुनने में अच्छा लगता है, परन्तु आप जब तक प्रार्थना करते रहेंगे, दुष्टात्माओं को अन्दर रखे रहेंगे। आप समझे? वे आपकी प्रार्थना से भाग नहीं सकते। अन्य भाषाओं में बात मत कीजिए। अन्य भाषाओं में बात करना अद्भुत है, परन्तु इसका समान प्रभाव होता है। यह दुष्टात्माओं को अन्दर रखता है। यह उसी प्रकार की बात है जैसे जब एम्बुलेन्स या पुलिस की गाड़ी सायरन बजाते हुए आती है और बहुत गाड़ियाँ रास्ता देती हैं और उन्हें जाने देती हैं। उसी प्रकार दुष्टात्माएँ भी बाहर जाती हैं। उनके लिये मार्ग बनाइए, उन्हें बाहर जाने दीजिए।
अब मैंने कहा, ‘‘विश्वास बिना कार्य मुर्दा है।’’ मैं नहीं कहता परन्तु बाइबल कहती है। ठीक है? तो जब आपने प्रार्थना कर लिया तो कुछ होने के इन्तजार में चुपचाप खड़े मत रहिए। केवल एक सामान्य काम कीजिए। साँस छोड़ना शुरू कीजिए। छोड़िए, और आप पायेंगे कि आपमें क्या समस्या है, कुछ ही क्षणों में यह मानव श्वास से बढ़कर होगा जो बाहर आ रहा है। आप वास्तव में यही हैं। अब जब यह होता है, तो आप सम्मानित स्थिति में नहीं होंगे, आप धार्मिक रूप से व्यवहार नहीं करेंगे। यदि आप सम्मानित और धार्मिक होने का निर्णय करेंगे, तो आपने जिस बात के लिये प्रार्थना किया है उसे खो देंगे। यह आपका विकल्प है। मैं आपको सलाह देता हूँ कि अपने आपको ढीला छोड़ दीजिए और उसे बाहर जाने दीजिए। मैंने लोगों से कहा है कि शैतान सभ्य व्यक्ति नहीं है। वह बिना बुलाए आता है और उसे अक्सर लात मारकर भगाना पड़ता है। जो कुछ आपके पास है उसे लात मारकर भगाईए, उसे छोड़िए मत। उससे घृणा कीजिए। ध्यान दीजिए, शैतान से घृणा करना पाप नहीं है, शैतान से घृणा न करना पाप है। अक्रिय रहना और उदासीन रहना पापमय होता है।
ठीक है। आपमें से जो यह प्रार्थना कहना चाहते हैं, क्या आप इस समय खड़े होंगे? हमारे पास तीन मिनट से अधिक समय नहीं है। ठीक है। अब हम यीशु-छुड़ानेवाले से प्रार्थना कर रहे हैं भाई प्रिन्स से नहीं। और मैं चाहता हूँ आप यह शब्द कहें। ये सब बाइबल से और जो कुछ मैंने सिखाया है उससे लिए गए हैं। ठीक है?
प्रभु यीशु मसीह, मैं विश्वास करता हूँ कि आप परमेश्वर के पुत्र हैं और परमेश्वर तक जाने का एक मात्र मार्ग है कि मेरे पापों के लिये आपने क्रूस पर मृत्यु सही और मृतकों में से जी उठे। आपकी करुणा और क्षमा पाने के लिये मैं आपके पास आता हूँ। मैं विश्वास करता हूँ कि आप मुझे क्षमा करते हैं और अपनी सन्तान के रूप में मुझे ग्रहण करते हैं। और चूँकि मुझे ग्रहण करते हैं, मैं अपने आपको परमेश्वर की सन्तान के रूप में ग्रहण करता हूँ। अब प्रभु, आप मेरी विशेष समस्या जानते हैं। दुष्टात्मा का प्रभाव जो मुझे यातना देता है। प्रभु, मैं आपकी शर्तों को पूरा करना और आपका छुटकारा पाना चाहता हूँ। सबसे पहले, मैं हर व्यक्ति को माफ करता हूँ जिसने मुझे हानि पहुँचाई है या मेरे प्रति गलत किया है। मैं इस समय उन सबको क्षमा करता हूँ। अब थोड़ी देर के लिये रुक जाएँ और उन लोगों के नाम धीमे-धीमे अपने आपसे बोलिए जिन्हें आपको क्षमा करना है। हम आगे जा रहे हैं। प्रभु, मैंने उन सारे लोगों को क्षमा कर दिया है। मैंने सारी कड़वाहट और क्रोध को, घृणा और विद्रोह को छोड़ दिया है और मैं मानता हूँ कि आपने मुझे क्षमा कर दिया है। इसके लिये मैं आपका धन्यवाद करता हूँ। मैं शैतान के साथ, मनोगत सामर्थ्य के साथ, गुप्त समाजों के साथ, शैतान के साम्राज्य की हर वस्तु के साथ हर संपर्क छोड़ता हूँ। मैं उस साम्राज्य में होने से मनफिराता हूँ और मैं अभी अपनी पीठ उसकी ओर से फेरता हूँ। साथ ही साथ प्रभु, यदि मेरे जीवन पर कोई श्राप है, तो मैं आपका धन्यवाद करता हूँ कि आप क्रूस पर श्राप बने ताकि मैं उस श्राप से छुड़ाया जाऊँ और आशीष प्राप्त करूँ। और मैं अभी इस बात का दावा करता हूँ। श्राप से मुक्त कीजिए और आशीष में प्रवेश कीजिए। और अब प्रभु मैं दुष्टात्मा के विरुद्ध आना चाहता हूँ। और मैं अपने में किसी भी दुष्टात्मा के विरुद्ध आना चाहता हूँ जो मेरे व्यक्तित्व के किसी भी क्षेत्र पर कब्जा किए हुए हैं। मैं आपको बताना चाहता हूँ कि मैं उनसे घृणा करता हूँ। ये मेरे शत्रु हैं। मैं उनसे समझौता नहीं करूँगा। मैं उनके साथ शान्ति स्थापित नहीं करूँगा। मुझमें अब उनका कोई स्थान नहीं होगा। मैं उनकी ओर पीठ फेरता हूँ और यीशु आपके नाम के अधिकार में मैं उन्हें आज्ञा देता हूँ कि मुझे छोड़ दें। यीशु के नाम से मैं अभी उन्हें बाहर निकालता हूँ। आमीन।
ठीक है। और प्रार्थना नहीं। मैं अन्तिम प्रार्थना करूँगा, आप उसको जाने देने का काम करें। विश्वास में अब भी उसे बाहर निकालना प्रारंभ करें।
अब प्रभु, आज सुबह आपके सेवक और प्रतिनिधि के रूप में स्थानीय नेतृत्व के अधिकार के अधीन होकर मैं यीशु के नाम में हर दुष्टात्मा के ऊपर आधीनता लेता हूँ, जो बाहर निकाला गया है और मैं उन्हें यीशु के नाम से जाने की आज्ञा देता हूँ। इन लोगों को मुक्त कर और यीशु के सर्वशक्तिमान नाम में इसी समय उनमें से जा। मैं कहता हूँ कि इस समूह के ऊपर यीशु मसीह प्रभु है कि उसने शैतान को हरा दिया है। कि मृत्यु और अधोलोक की कुन्जियाँ उसके पास हैं। कि स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार उसको दिया गया है। शैतान, यीशु के नाम के कारण तू हमारे अधिकार में है। तुम्हें हमारी आज्ञा माननी है। तुम्हें लोगों में से जाना होगा। तुम्हारे पास कोई विकल्प नहीं है। बाइबल कहती है, कि तुम्हें अवश्य ही जाना है, और अवश्य ही जाओ, शैतान। यीशु के नाम में आमीन।
अब पूर्ण छुटकारा पाओ। अपने आपको सब कुछ से मुक्त कर दो। एक बार जब अभिषेक मिल जाए, तो आप सब चीज से छुटकारा पा जाएँगे और जब अभिषेक ऊपर उठाता है तो यह करना काफी कठिन होता है। हाँ, यह ठीक है। अन्य लोगों के समान चिन्ता मत कीजिए। अपने सम्मान को पकड़े मत रहिए। कुछ ही क्षणों में वह वापस आ जाएगा। ठीक है? धन्यवाद प्रभु, धन्यवाद पिता, धन्यवाद प्रभु यीशु। तेरा नाम पवित्र माना जाए। तेरे नाम की स्तुति हो। आमीन।
इसी पर बने रहिए। शैतान कठोर है। आप और अधिक कठोर बनिए। आमीन। आपका धन्यवाद प्रभु। आपका धन्यवाद प्रभु। आपका धन्यवाद पिता। आपका धन्यवाद प्रभु। आपका धन्यवाद प्रभु।
अब यदि आप विश्वास करते हैं, तो आपने छुटकारा पा लिया है, तो परमेश्वर का धन्यवाद करना शुरू कीजिए। और स्मरण रखिए, इस स्थान को छोड़ने से पहले। यीशु को अपना प्रभु बनाईए।
குறியீடு: MV-4129-100-HIN









