आशा अनिवार्य है

Teaching Legacy Letter
*First Published: 2017
*Last Updated: जनवरी 2026
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शायद आप इस कहावत से परिचित हैं, “जहाँ जीवन है, वहाँ आशा है।” उस कहावत में काफी सच्चाई है। लेकिन इसके विपरीत भी सच है: “जहाँ आशा है, वहाँ जीवन है।” मेरे विचार से, निराशा मानव अनुभव में सबसे दुखद स्थितियों में से एक है - और हमारी दुनिया में आज लाखों लोग आशाहीन लोग हैं। लेकिन परमेश्वर का धन्यवाद हो - आपको और मुझे आशाहीन होने की आवश्यकता नहीं है!
मेरा मानना है कि पवित्रशास्त्र में प्रस्तुत वास्तविक आशा, किसी को जीवन पर पूरी तरह से एक नया दृश्टिकोण दे सकती है। इसीलिए मैंने इस पाँच-भाग की शिक्षण विरासत श्रृंखला : आशा के भीर्शक के लिए इसे अपना विशय चुना है। मुझे भरोसा है कि इन संदेशों में जो साझा किया गया है, वह आपको यह समझने में मदद करेगी कि आशा क्या है, यह कितना महत्वपूर्ण है, और सबसे बढ़कर, आप इसे इसे पा सकते हैं।
शाश्वत नींवें
आशा के विषय पर परिचय के माध्यम से, आईए हम १ कुरिन्थियों, अध्याय १३, पद १३ पर एक नजर डालें जहाँ पौलुस कहते हैं:
पर अब विश्वास, आशा, प्रेम ये तीनों स्थाई है, पर इन में सब से बड़ा प्रेम है।
उस पद में, पौलुस हमारे सामने मसीही विश्वास की तीन स्थाई आत्मिक वास्तविकताओं को प्रस्तुत करते हैं। जीवन में हम जो कुछ अनुभव करते हैं, उसमें से बहुत कुछ आता जाता रहता है। इसमें से कुछ महत्वपूर्ण या एक निश्चित अवधि या एक निश्चित स्थिति के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं, जिसका हम सामना करते हैं। लेकिन ये तीन वास्तविकताएँ जो हमेशा के लिए हैं: विश्वास, आशा और प्रेम।
अधिकांश मसीहियों ने विश्वास और प्यार के बारे में काफी कुछ सुन हुआ है। परंतु, कई मामलों में, उन्होंने आशा के बारे में तुलनात्मक रूप से थोड़ा सुना है। बहुत वर्षों पूर्व यही मेरी हालत थी जब मुझे परमेश्वर से सहायता की सख्त जरूरत थी। मैंने विश्वास पर बहुत सारे संदेश सुने थे। मैंने प्रेम पर कुछ उपदेश सुना था। लेकिन उस विशेष स्थिति में मुझे जो संदेष चाहिए था वह आशा के बारे में था। मुझमें उस जरूरत को पूरा करने के लिए, पवित्र आत्मा को मुझे सीधे पवित्र शास्त्र में ले जाना पड़ा था, क्योंकि मैं कोई उपदेश नहीं जानता था जो आशा के बारे में था। लेकिन यह परमेश्वर के वचन में था जिससे पवित्र आत्मा ने मेरी ज़रूरत को पूरा किया।
मेरे अनुभव और आशा के बारे में मेरी स्वयं की गहरी आवष्यकता के परिणाम के रूप में, मेरी एक विषेश अभिलाशा है कि लोग आशा के महत्व को समझें। जैसा कि मैंने कहा, मैं भरोसा करता हूँ कि इस विशय पर इस वर्श हम जो बात रखते हैं, उससे आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि आशा क्या है, यह कितना महत्वपूर्ण है और आप यह कैसे पा सकते हैं।
आशा अनिवार्य है
विश्वास और प्रेम दोनों को बनाए रखने के लिए आशा अनिवार्य है। जबकि हम इस श्रृंखला कि जब तक हमारेपास आशा न हो, हमारा विश्वास कम होता जाएगा और हमारा प्रेम पराजित हो जाएगा। के लिए अनिवार्य है।में आगे बढ़ते हैं, मैं बहुत तरह से आपको दिखाऊँगा कि जब तक हमारे पास आशा न हो, हमारा विश्वास कम होता जाएगा और हमारा प्रेमपराजित हो जाएगा। इसलिए, आशा एक विकल्प नहीं हैं। यह एक मिश्रण है, जो कि मसीही जीवन की पूर्णता
जैसा कि हमने पहले कहा, एक कहावत है जिसका उपयोग अकसर लोग करते हैं: "जहाँ जीवन है, वहाँ आशा है।” मुझे लगता है कि उसमें एक बड़ी सच्चाई है। लेकिन मुझे बताने दीजिए कि इसके विपरीत भी सच है: “जहाँ आशा है वहाँ जीवन है।" और इसके विपरीत, "जहाँ आशा नहीं हैं, वहाँ जीवन नहीं है।” मेरे विचार से, आशाहीनता मानव अनुभव में सबसे दुखद स्थितियों में से एक है-और आज हमारे संसार में असंख्य लोग आशाहीन लोग हैं। परन्तु धन्यवाद हो कि मुझे और आपको आशाहीन होने की आवष्यकता नहीं है।
मिलकर काम करना
आशा के बारे में अपनी समझ को बढ़ाने के लिए आइए १ थिस्सलुनीकियों अध्याय १ पद २-४ में देखें। इस भाग में पौलुस थिस्सलुनीके के मसीहियों, परमेश्वर के लोगों, की एक तस्वीर प्रस्तुत करते हैं जो अपनी पूर्ण विरासत का आनंद उठाते हैं। उनको विश्वास है, उनको आशा है और उनके पास प्रेम है। कृपया ध्यान दें कि जब वह उनके लिए परमेश्वर का धन्यवाद करता है तो वह इन तीनों गुणों का वर्णन करता है। पौलुस यह कहते हैं:
“हम अपनी प्रार्थनाओं में तुम्हें स्मरण करते और सदा तुम सब के विशय में परमेश्वर का धन्यवाद करते हैं। और अपने परमेश्वर और पिता के साम्हने तुम्हारे विश्वास के काम, और प्रेम का परिश्रम, और हमारे प्रभु यीशु मसीह में आशा की धीरता को लगातार स्मरण करते हैं। और हे भाइयो, परमेश्वर के प्रिय लोगों हम जानतें हैं, कि तुम चुने हुए हो...।"
यह स्पश्ट है कि थिस्सलुनीकिया में उन मसीहियों की आत्मिक दषा न पौलुस को कायल किया कि वे सचमुच परमेश्वर के द्वारा चुने गए लोग थे। उसने उनमें जो देखा वे तीन स्थाई सच्चाईयाँ थींः विश्वास, प्रेम और आशा। उनके लिए अपनी स्तुति में वह यह वर्णन करने के लिए एक विषिश्ट शब्द का उपयोग करता है कि उन सच्चाईयों में से प्रत्येक के विशय में विषेश क्या है। वह विश्वास का कार्य, प्रेम का परिश्रम, और आशा की धीरता के बारे में बात करता है। आगे के भागों में हम एक क्षण के लिए उन वाक्यांवो में से प्रत्येक पर नजर डालेंगे और उन पर मन करेंगे।
सबसे पहले, विश्वास को अवष्य ही कार्यों या गतिविधियों द्वारा अभिव्यक्त किया जाना चाहिए। विश्वास जो काम नहीं करता है वह मृत विश्वास है। इस विशय में पौलुस गलतियों ५:६ में यह कहता है:
और मसीह यीशु में न खतना, न खतनारहित कुछ काम का है, परन्तु केवल विश्वास का जो प्रेम के द्वारा प्रभाव करता है।
ध्यान दें, विश्वास प्रेम के द्वारा कार्य करता है। यही बात याकूब की पुस्तक दूसरी रीति से कहता है। याकूब २:२६ में हम पढ़ते हैं:
निदान, जैसे देह आत्मा बिना मरी हुई है वैसा ही विश्वास भी कर्म बिना मरा हुआ है।
हम देखते हैं कि विश्वास की विषिश्ट अभिव्यक्ति कार्य हैं। यह गतिविधि है। यह कुछ ऐसा करना है जो हमारे विश्वास का परिणाम है और हमारे विश्वास को अभिव्यक्त करता है। कर्म बिना विश्वास मृत विश्वास है।
इस परिच्छेद में जिसका संदर्भ कर्म बिना विश्वास हमने इस भाग के प्रारंभ में दिया, मृत विश्वास है। थिस्सलुनीकियों को पौलुस के वचन में वह “प्रेम के कर्म” के बारे में बात करता है। “कर्म” शब्द का अर्थ "सचमुच कठिन श्रम” है। क्या यह सच्चे प्रेम की बड़ी विशेशता नहीं है? सच्चा प्रेम यूँही बैठे रहकर सहानुभूति नहीं दिखाता है। सच्चा प्रेम वहाँ पहुँच जाता है जहाँ काम होता है, अपनी कमीज की बाँहें ऊपर चढ़ाता है और कुछ स्पश्ट और वास्तविक करता है। प्रेम में श्रम खर्च होता है। यह एक मूल्य की माँग करता है, संभवतः थकावट और अनिद्रा। प्रेम श्रम करता है। यह एक निश्क्रिय भावना नहीं है। प्रेम एक सक्रिय, प्रेरक शक्ति है जो लोगों को दूसरों के स्थान पर त्यागपूर्ण परिश्रम करने के लिए प्रेरित करता है।
फिर पूर्व में उद्धृत पद में, हम आशा के बारे में वाक्यांश पर आते हैं। पौलस थिस्सलुनीके के उन मसीहियों से कहता है, “(तुम्हारी) आशा की धीरता।" तब हम देखते हैं कि आशा दृढ़ता, धीरज, अटलता उत्पन्न करता है। दृढ़ता, धीरज, अटलता के उन गुणों के बिना, जिन्हें आशा उत्पन्न करती है, हम आसानी से पहले दो गुणों के लाभ खो सकते हैं-अर्थात् विश्वास और प्रेम।
आशा का स्रोत
फिर आशा कैसे आती है? हमारे पास इस तरह की आशा कैसे हो सकती है जो इतनी वास्तविक और इतनी आवश्यक है? उत्तर यह है कि आशा नया जन्म का प्रत्यक्ष परिणाम है। यह यीशु मसीह में विश्वास के माध्यम यह यीशु मसीह से पवित्र आत्मा मे नया जन्म लेने का प्रत्यक्ष परिणाम है। यह यीशु मसीह में सिर्फ सामान्य विश्वास के माध्यम से नहीं, बल्कि उसकी मृत्यु, दफन और पुनरुत्थान में एक विशिष्ट विश्वास के द्वारा होता है। इस सत्य की पुष्टि पतरस द्वारा १ पतरस अध्याय १, पद ३ में कही गई बातों से होती है:
हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर और पिता का धन्यवाद दो, जिस ने यीशु मसीह को मरे हुओं में से जी उठने के द्वारा, अपनी बड़ी दया से हमें जीवित आशा के लिए नया जन्म दिया।
कृपया उस बहुत महत्वपूर्ण वाक्यांश पर ध्यान दें: “यीशु मसीह को मरे हुओं में से जी उठने के द्वारा, अपनी बड़ी दया से हमें जीवित आशा के लिए नया जन्म दिया।” यह हमें बताता है कि जब हम अपने बदले में यीशु मसीह की मृत्यु पर और फिर परमेश्वर की सामर्थ्य से मृतकों में से उसके जी उठने पर विश्वास करते हैं तो हम नया जन्म प्राप्त करते हैं; हम नया जन्म पाते हैं। हम एक नई आशा में जन्म लेते हैं। कोई मृत सिद्धांत नहीं, परन्तु एक जीवित, लेकिन एक जीवित, सजीव आशा।
मृतकों में से यीशु मसीह के पुनरुत्थान के माध्यम से हमारे पास आशा आती है। हमें स्पष्ट रूप से सभी आशा के लिए यह परम ऐतिहासिक आधार समझना चाहिए। सच्ची आशा के लिए अधार यीशु का पुनरुत्थान है। यीशु के पुनरुत्थान, के बिना जीवन आशाहीन होगा। यीशु का पुनरुत्थान ही है जो हमें एक जीवित आशा में लाता है।
आशा जारी है
हमारे लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि हमारे उद्धार की पर्णता तक अवष्य ही यह आशा जारी रहे। इससे पहले हमने १ पतरस के एक उद्धरण को देखा। हम उसी पहली पत्री में एक और महत्वपूर्ण सच्चाई देखते हैं। यह पद उसी पहले अध्याय में थोड़ा और आगे पद १३ में भी है:
इस कारण अपनी अपनी बुद्धि की कमर बान्धकर, और सचेत रहकर उस अनुग्रह की पूरी आशा रखो, जो यीशु मसीह के प्रगट होने के समय तुम्हें मिलनेवाला है।
यहाँ पतरस यह कह रहा है कि उद्धार की प्रक्रिया अब तक पूर्ण नहीं हई है। अंततः यह यीशु मसीह के प्रकट होने से पूर्ण होने जा रहा है। इस दौरान, आपको और मुझे भविश्य की उस घटना पर अपनी आशा को केंद्रित करना है। दूसरे शब्दों में, सारी मसीही आशा का परम केंद्र प्रभु यीशु मसीह हमें अपनी आशा को पूरी तरह से उस अनुग्रह और आशीश पर केंद्रित करना होगा जो महिमा में यीशु की वापसी के द्वारा हमारा होगा।
अंत तक
इस महत्वपूर्ण सिद्धांत के समान इब्रानियों का लेखक इब्रानियों ३:६ में आशा का एक और बहुत महत्वपूर्ण पहलू सामने लाता है:
पर मसीह पुत्र की नाई उसके घर का अधिकारी है, और उसका घर हम हैं, यदि हम साहस पर, और अपनी आशा के घमण्ड पर अन्त तक दृढ़ता से स्थिर रहें।
कृपया फिर से ध्यान दें, कि इस आशा को अंत तक बनाए रखा जाना चाहिए। आप और मैं आशा करना तब तक छोड़ नहीं सकते जब तक हमारी आशा घटना के द्वारा पूरा न हो। यही कारण है कि इब्रानियों का लेखक ऊपर उपदेश देता है। परमेश्वर के लोगों का हिस्सा बनने के लिए हमें अवष्य ही अपने साहस और अपनी आशा के घमण्ड पर अन्त तक दृढ़ता से थामे रहना है।
जिस तरह की आशा हमें बनाए रखनी चाहिए वह केवल एक निष्क्रिय आंतरिक आशा नहीं है। बल्कि, यह कुछ बहुत ही मजबूत, बहुत ही भरोसेमंद है। यह एक आशा है, जो घमंड करती है – अपने आप में नहीं परन्तु प्रभु में।
गर्व करने, हमारी आशा की मौखिक अभिव्यक्ति को बनाए रखने के लिए हमारे लिए यह निर्देश उस बात का भाग है जो परमेश्वर ने हमारे लिए प्रदान किया है। यह आशा के साथ जाता है, और बदले में आशा विश्वास और प्रेम के साथ जाती है। हमें अपनी आशा के इस गर्वीले भरोसे को – प्रभु यीशु के आगमन के बारे में हमारी अपेक्षा का यह लगातार बातचीत – अपने जीवनों के अंत तक या यीशु मसीह के आने तक बनाए रखना है।
आशा उपलब्ध ह
मुझे आशा पर इस वर्ष के शिक्षण विरासत विशय के पहले खंड को आपसे एक सवाल पूछकर समाप्त करने दें। क्या आपको आशा है? क्या आप ईमानदारी से कह सकते हैं कि आपके पास जीवंत आशा है जिसे हमने उस विशय की बाइबल खोज में देख लिया है? या क्या आप अपने आप को ऐसी ही समान स्थिति में वर्णन करेंगे जहाँ मैं पवित्रात्मा द्वारा मेरी आँखे खोलने से पहले था?
यदि उस प्रश्न का आपका उत्तर अनिश्चित है, तो आइए अब एक साथ कार्रवाई करें। मैं आपको एक प्रार्थना – से जीवन में हमारे हृदयों में आशा लाने के लिए कहते हुए में शामिल होने के लिए आमंत्रित करना चाहता हूँ। क्या आप मेरे साथ शमिल होंगे?
*Prayer Response
प्रभु, मुझे यकीन नहीं है कि मेरे पास उस मात्रा में एक जीवित आशा है जितनी इस समय मुझे आवश्यकता है। अब तक हमने आपके वचन में जो देखा है, उससे मुझे पता है, कि यह मेरे जीवन में एक शक्तिशाली बल हो सकता है। प्रभु, मुझे वह चाहिए। कृ पया, आज ही मेरे जीवन में मेरे हृदय में सच्चे आशा लाने की प्रक्रिया प्रारंभ करें। धन्यवाद प्रभु, आमीन।
कोड: TL-L114-100-HIN