ये नियम की कलीसिया को आराधना के विषय में पौलुस निर्देश देते हुए लिखते हैं कि दूतों के कुछ खास क्रियायों का पालन करना होगा “दूतों के कारण” (१ कुरिन्थियों ११:१०)। पौलुस पूर्ण रूप से सहमत है कि जब मसीही जन एकत्रित होकर आराधना करते हैं तो वहां दूत जन भी मौजूद होते हैं और उस आराधना में शामिल होते हैं।

This is the first in a series of six teaching letters called Because of the Angels. As an introduction, we will explore Biblical accounts of the ways that angels play a role in believers' lives.

एक से ज्यादा बार जब मैं और रूत आराधना कर रहें थे, तो रूत ने दूतों को गाते सुना। हमने यह महसूस किया कि पूरे ब्रह्माण्ड की आराधना जो स्वर्ग और पृथ्वी में है, हमें उसके एक अंश बनने का सौभाग्य मिला। मैनें ऐसी ही गवाही कई और मसीहियों से सुना।

इब्रानियों का लेखक बताता है कि परमेश्वर के दूत कैसे हैंः “क्या वे सब सेवा टहल करनेवाली आत्माएं नहीं, जो उद्धार पानेवालों के लिये सेवा करने को भेजी जाती है” (इब्रानियों १:१४) 1 सेवा टहल करने वाली आत्मा को ग्रीक में उन आत्माओं को कहा गया है जो पुरोहित संबधित आराधनाओं को कहते है।

उत्तराधिकार प्राप्त दूतों का विद्रोह

बाईबल उत्तराधिकार प्राप्त दूतों की परमेश्वर से एक विद्रोह को प्रगट करती है। सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण था लूसीफर (सर्वश्रेष्ठ दूत) का विद्रोह जिसका विवरण यशायाह में दिया गया है।

“हे भोर के चमकने वाले तारे, तू क्योंकर आकाश से गिर पड़ा है? तू जो जाति जाति को हरा देता था, तू अब कैसे काटकर भूमि पर गिराया गया है? तू मन में कहता तो था कि मैं स्वर्ग पर चढूंगा। मैं अपने सिंहासन को ईश्वर के तारागण से अधिक ऊंचा करूंगा’ और उत्तर दिशा की छोर पर सभा के पर्वत पर विराजूंगा; मैं मेघों से भी ऊंचे ऊंचे स्थानों के ऊपर चढूंगा, मैं परमप्रधान के तुल्य हो जाऊंगा” (यशायाह १४:१२-१४) ।

मेरी तरफ से, मैं यह विश्वास करता हूं कि शैतान जिस अलौकिक व्यक्ति का स्थान लेना चाहता था वह परमेश्वर पिता नहीं बल्कि परमेश्वर जो पुत्र बना (यह मानव इतिहास में बाद में प्रगट हुआ नसारी यीशू के रूप में)। इन दोनों के युद्ध का अन्त क्रूस पर हुआ; जब ऐसा लगा की शैतान ने प्रत्यक्ष रूप से यीशू को हरा दिया, परन्तु यथार्थ में यीशु ने शैतान के सारे अस्त्र छीन कर उसे नग्न कर दिया और उसे पूर्ण रूप से पराजित किया। “और उसने प्रध् गानताओं और अधिकारों को अपने ऊपर से उतार कर उनका खुल्लमखुल्ला तमाशा बनाया और क्रूस के कारण उन पर जय-जयकार की ध्वनि सुनाई” (कलीसियों २ः१५ )।

प्रकाशितवाक्य १२ः३-४ में शैतान के बारे में यह कहा गया “एक बड़ा लाल अजगर” जिसके “पूंछ ने आकाश के तारों की एक तिहाई को खींचकर”। स्पष्ट रूप से सर्वश्रेष्ठ दूत लूसिफर (अब शैतान) के पास स्वर्ग दूतों की एक तिहाई अधिकार था और वे दूत उसके और उसके विद्रोह का अनुसरण कर रहे थे और वे उसके साथ स्वर्ग में से निकाले गये। शैतान और उसके पीछे चलने वाले दूतों ने एक प्रतिद्वंदी राज्य की स्थापना की (देखें इफिसियों ६ः१२)।

जबकि शैतान का भविष्य मसीह के क्रूस के द्वारा पराजित होने से स्पष्ट हो गया, फिर भी अन्तिम न्याय उस पर इस युग के समाप्ति तक नहीं आयेगा। उस समय शैतान ‘मसीह के विरोधी’ के साथ “आग और गन्धक की उस झील में डाल दिया जायेगा और वे रात दिन युगानुयुग पीड़ा में तड़पते रहेंगे” (प्रकाशितवाक्य २०:१०)।

प्रलय से पहले गिरे हुए दूत

उन दूतों के ओर अतिक्रमण को बताया गया है उत्पत्ति ६ः१-२ मेंः

“फिर जब मनुष्य भूमि के ऊपर बहुत बढ़ने लगे और उनके बेटियां उत्पन्न हुई, तब परमेश्वर के पुत्रों ने मनुष्य की पुत्रियों को देखा कि वे सुन्दर है; सो उन्होंने जिस जिसको चाहा उनसे ब्याह कर लिया।”

यह “परमेश्वर के पुत्र” कौन है? अय्यूब की पुस्तक में दो बार इनका जिक्र किया गया है।

पहला “एक दिन यहोवा परमेश्वर के पुत्र उसके सामने उपस्थित हुए और उनके बीच शैतान भी आया” (अय्यूब १:६) ।

और फिर से जब परमेश्वर अय्यूब से पूछता हैः “जब मैंने पृथ्वी की नेव डाली तब तू कहां था? जबकि भोर के तारे एक संग आनन्द से गाते थे और परमेश्वर के सब पुत्र जय-जयकार करते थे” (अय्यूब ३८ः४-७)।

स्पष्ट रूप से इन दोनों पदों में ‘परमेश्वर के पुत्र’ दूत जन हैं। जब परमेश्वर इस पृथ्वी की नींव रख रहा था उस समय कोई मानव जाति मौजूद नहीं थी।

नये नियम में दो पद हैं जहां परमेश्वर ने अपना न्याय उन दूतों के प्रति ठहराया जिन्होंने मनुष्य स्त्रियों से पाप किये। यहूदा ६ कहता हैः,“फिर जो स्वर्गदूतों ने अपने पद को स्थिर न रखा वरन अपने निज निवास को छोड़ दिया, उसने उन को भी उस भीषण दिन के न्याय के लिए अन्धकार में जो सदा काल के लिये है बन्धनों में रखा है।”

यह शैतान के वास्तविक विद्रोह में शामिल हुए दूत नहीं है क्योंकि शैतान और उसके दूत अभी कैद में नहीं है बल्कि वे “आकाश मंडलों” में स्वतन्त्र और सक्रिय है। उन दूतों के पाप के बारे में यहूदा बताते हैं कि वे अपने स्वर्ग के नियुक्त स्थान को छोड़कर नीचे पृथ्वी की सतह पर आये जहां उन्होंने मनुष्य पुत्रियों के साथ सहवास किये।

यहूदा फिर जारी रखता हैः “जिस रीति से सदोम और अमोरा और उनके आस पास के नगर, जो इनकी नाई व्याभिचारी हो गए थे और पराए शरीर के पीछे लग गए थे, आग के अनन्त दण्ड में पड़कर दृष्टान्त ठहरे है” -आयत ७।

यहूदा ने नूह के दिनों के गिरे हुए दूतों की तुलना सदोम और अमोरा के लोगों से किया क्योंकि दोनों समान पाप से दोषी ठहरे, जो थे व्यभिचार और पराये शरीर के पीछे लगना।

पतरस भी नूह के दिनों के गिरे हुए दूतों और सदोम और अमोरा के लोगों को जोड़ते हैंः

“क्योंकि जब परमेश्वर ने उन स्वर्गदूतों को जिन्होंने पाप किया, नहीं छोड़ा, पर नरक में भेजकर अन्धेरे कुण्ड में डाल दिया, ताकि न्याय के दिन तक बन्दी रहे। और प्रथम युग के संसार को भी न छोड़ा, वरन भक्तिहीन संसार पर महा जल-प्रलय भेजकर धर्म के प्रचारक नूह समेत आठ व्यक्तियों को बचा लिया। और सदोम और अमोरा के नगरों को विनाश का ऐसा दण्ड दिया, कि उन्हें भस्म करके राख में मिला दिया ताकि वे आनेवाले भक्तिहीन लोगों को शिक्षा के लिए एक दृष्टान्त बनें। और धर्मी लूत को जो अधर्मियों के अशुद्ध चाल-चलन से बहुत दुखी था छुटकारा दिया” (२ पतरस २ः४-७)।

दोनों जगहों पर इनका पाप अप्राकृतिक कामुकता था। चौथे पद पर, इसका अनुवाद इस प्रकार है “उन्हें नरक में भेजकर”। इसका ग्रीक शब्द है टारटाउस (Tartaus), यह शब्द ग्रीक साहित्य में अक्सर प्रयोग में आता है। टारटाउस को जिस प्रकार पारिभाषित किया गया है वह है “एक कैद की जगह जो अधोलोक से भी नीचे है जिस प्रकार अधोलोक पृथ्वी के नीचे है।”

यह आश्चर्यजनक बात है कि प्रभु इस संसार के कुछ पापों को कब तक सहता रहेगा, परन्तु कई ऐसी सीमायें हैं जो परमेश्वर ईर्ष्यापूर्वक देखता रहता है। उन सीमाओं में एक है पराये शरीर के पीछे लगना, यह चाहे दूत और मनुष्य के बीच हो, या मनुष्यों के ही बीच हो या एक ही लिंग के बीच क्यों न हो। जब सीमा का उल्लंघन होता है तो परमेश्वर का कठोर न्याय तुरन्त होता है। एक बार न्याय एक प्रलय के रूप में आया; दूसरी जगह दो नगरों की जनसंख्या को पूर्ण रूप से कुछ ही पल में मिटा दिया गया।

इन दिनों के मिलते जुलते पाप

बाईबिल दर्शाती है कि दूतों और मनुष्य पुत्रियों के बीच के सहवास सिर्फ उस प्रलय तक ही पूरी तौर से समाप्त नहीं हुई। “उन दिनों में पृथ्वी पर दानव रहते थे; और इसके पश्चात् जब परमेश्वर के पुत्र मनुष्य की पुत्रियों के पास गए तब उनके द्वारा जो सन्तान उत्पन्न हुए वे पुत्र शूरवीर होते थे, जिनकी कीर्ति प्राचीनकाल से प्रचलित है” (उत्पत्ति ६ः४)।

इब्रानी शब्द (Nephilim) जिसका अर्थ है दानव सीधा इब्रानी क्रिया (naphal) से लिया गया है जिसका अर्थ है ‘गिराव’। दानव (nephalim) का अर्थ होगा “गिरे हुए जन- जो है गिरे हुए दूत । ‘उन दिनों में’ पृथ्वी पर दानव थे (उन दिनों से तात्पर्य है, प्रलय के दिनों में) और “इसके पश्चात” भी (जो है प्रलय के बाद)।

उन दिनों में जो इन अप्राकृतिक संबंध से उत्पन्न हुए उन्हें ‘शूरवीर’ कहा गया। ग्रीक के पौराणिक कथाओं में इन जैसे शूरवीरों का वर्णन किया गया है। वे उत्पन्न हुए जब विशेष प्राणी, जिन्हें ग्रीक में देव कहा जाता है, उनका संबंध जब मनुष्य पुत्रियों से हुआ। देवगण आलौकिक शक्ति वाले जाति के ऊंची जगहों से आये थे। बाईबिल इन्हें शूरवीर कहती है। हकीकत में वे गिरे हुए दूत थे।

कुछ उदाहरण देना चाहूंगा, जीयस (Zeus) (देवों के पिता) जिसने एक हंस के रूप में लीड़ा (leda) नामक स्त्री से सहवास किया। उस स्त्री ने तीन बच्चों को जन्म दिया। दूसरे कथाओं में जीयस (Zeus) ने एक बैल का रूप धारण कर यूरोपा (Europa) नामक स्त्री से सहवास किया, जिससे तीन पुत्र जन्मे । एक और देवता (god) कहलाने वाला, वह भी एक स्त्री के साथ एक हुआ और उस स्त्री ने एक पुत्र को जन्म दिया जिसे थेसस (Thesus) कहा गया। थेसस आगे चलकर एक मशहूर ग्रीक का शूरवीर हुआ।

और भी बहुत उदाहरण इसमें जोड़ सकते है। यह पौराणिक कथाऐं इस सच्चाई को सामने लाती हैं। उत्पत्ति ६ः४ में इन बातों को संयुक्त किया गया है।

नूह के दिनों की तरह

लूका १७:२६ में यीशू हमें चेतावनी देते हैंः “जैसा नूह के दिनों में हुआ था वैसा ही मनुष्य के पुत्र के दिनों में भी होगा।” दूसरे वाक्यों में कहा जाये तो नूह के दिनों में जो परिस्थिति का बयान है वही आज के युग के अन्त के समयों में होगा।

नूह के दिनों में “पृथ्वी परमेश्वर की दृष्टि में बिगड़ गई थी, और उपद्रव से भर गई थी (उत्पत्ती ६ः११)। दोनों लक्षण आज हमारी आखों के सामने प्रकट होती दिखती हैः नैतिक मुल्यों में

नूह के दिनों में भी मानवता पर आक्रमण कर मनुष्य के पुत्रियों पर अपनी लालसा दिखायी गई। और एक बात हमें हैरान करती है कि पिछले कई वर्षों से प्रसारण माध्यमों ने “अंतरिक्ष के बाहर के लोगों का आखों देखा हाल का विवरण दिया है।

क्या यह कोई शैतानी प्रकटन तो नही है? अगर हम इन बातों को बनावटी बातें बोलकर नज़रअन्दाज कर दे तो भी पवित्र शास्त्र के बताए लक्षण के सच्चाई को नहीं मिटा सकती जो कहती है कि नूह के दिनों से यह सब और बढ़ती जाएगी। मैं समझता हूँ कि गिरे हुए दूत फिर से पृथ्वी पर अपना कार्य कर रहें है।

A Timely Word from Paul

पौलूस की चेतावनी को ध्यान में रखने की सख्त आवश्यकता है जो १ कुरिन्थियों ११:२-१६ में है, और जिसमें बताते है कि हर पुरूष का सिर मसीह, और स्त्री का सिर पुरूष । पौलुस कलीसिया को एक थोड़े से लोगों का झुंड नहीं बताते है जो स्वयं ही कुछ धार्मिक निर्माण के कारण एकत्र होते है। परन्तु पौलुस कलीसिया को एक विशाल और ऐसे कार्यों से भरपूर स्थान मानता है जिसमें पृथ्वी और स्वर्ग सम्मलित होते है। यह सभा सिर्फ मनुष्यों तक ही सीमित नहीं है परन्तु दूत जन, अच्छे और बुरे दोनों, इसमें उपस्थित होते है। विशेषकर, पौलुस स्त्रियों को कलीसिया के आराधना में भाग लेने मे कुछ चेतावनीयों को देते है क्योंकि वे अच्छे और बुरे दूतों के बारे में सचेत हो सकें।

पौलुस की प्रतिक्रिया थी कि स्त्रियां अपना सिर सही रूप से ढके। यही आयत था जो मैंने इस अध्याय के 66 शुरूआत में जिक्र किया इसलिए स्वर्गदूतों के कारण स्त्री को उचित है, कि अधिकार अपने सिर पर रखे” (१ कुरिन्थियों ११:१०) । इस प्रकार वे स्वीकार करते हैं कि वे उस अधिकार में है जिस प्रकार मसीह का कलीसिया के ऊपर है। वे अच्छे दूतों का आदर करते हैं और साथ ही साथ उन मलिन अलौकिक प्रभाव जो बुरे दूतों से आती है, अपना बचाव करते हैं ।

१ कुरिन्थियों ११:२-१६ में जो निर्देश पौलुस ने आराधना के विषय में दिया है उसे हम एक शब्द में बयान करें तो वह होगाः ‘आदर’।

मेरा आदर कहां है?

मलाकी के समय में, परमेश्वर ने अपने जन को उनके कपटी आराधना के लिए उन्हें दोषी ठहराया। वे बहुत धार्मिक थे 'फिर भी वे आदर के योग्य नहीं थे'। मलाकी १:६ में परमेश्वर कहता हैः

“पुत्र पिता का, और दास स्वामी का आदर करता है। यदि मैं पिता हूं, तो मेरा आदर मानना कहां है?

और यदि मैं स्वामी हूं, तो मेरा भय मानना कहां है” उसके पश्चात मलाकी १:१४ में वह यह निष्कर्ष निकालता हैः

“जिस छली के झुण्ड में नरपशु हो परन्तु वह मन्नत मानकर परमेश्वर को बर्जा हुआ पशु चढ़ाए, वह शापित है; मैं तो महाराजा हूं, और मेरा नाम अन्य जातियों में भययोग्य है”।

हर सभ्यता में राजा के द्वारा उसके जनों को चलाये जाने के लिए एक निश्चित नियमों का प्रयोग किया जाता है। इन नियमों को हम कहते हैं 'मूललिपि'।

संसार के राजा के समान, हमारे प्रभु के पास भी एक मूल लिपि है। १ कुरिन्थियों ११:२-१६ में स्वर्गीय ‘मूल लिपि’ के कुछ आवश्यकताओं को बताया गया है। वे हमें यह याद दिलाती है कि मसीही जब अपने आराधना को सिर्फ एक छोटे से झुंड तक सीमित नहीं है। बल्कि पौलुस कहते है, “हम जगत और स्वर्गदूतों और मनुष्यों के लिये एक तमाशा ठहरे हैं” (१ कुरिन्थियों ४:६)।यहां पर दूत से तात्पर्य अच्छे और बुरे दूतों से है

इसलिए हमें जरूरत है कि हम स्वर्गीय मूललिपि के सभी आवश्यकताओं का अनुसरण करें। प्रभु के लिये सिर्फ हमारे आदर ही प्रमुख नहीं है परन्तु हमारे स्वयं की रूचि भी इसमें होनी चाहिए।

The theme of my next letter will be Warfare In Heavenly Places.

21
शेयर करना